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Sunday, November 29, 2020

Coronavirus vaccine: मरीज जाएं भाड़ में, वैक्सीन के बहाने धन बटोरने की होड़

ऐसा लगता है कि COVID-19 की बीमारी को बिग फार्मा कंपनियों के दबाव पर हौवा बनाकर खड़ा किया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में टीका और दवा के जरिये अकूत दौलत बनाकर दुनिया पर राज किया जा सके।

नई दिल्लीः कोरोना वायरस (Coronavirus vaccine) ने इंसानियत को शर्मसार करने वाला समय सामने ला दिया है। न सम्मानजनक इलाज, न मौत के बाद शरीर का सम्मान। सरकारें जहां अपनी विफलता के लिए मौत के आंकड़े छिपा रही है, वहीं दूसरी ओर WHO बार-बार गाइडलाउन बदलकर भ्रम पैदा कर रहा है। आपदा को अवसर में बदला जा रहा है।

N-95 और KN-95 मास्क 50 से 60 रुपये के बीच बिक रहे हैं। PPE किट एक बार प्रयोग के लिए 225 रुपये के आसपास और पांच बार उपयोग के लायक 350 रुपये तक मिल रहे हैं, लेकिन निजी नर्सिंग होम कोरोना वायरस (COVID-19) के मरीजों से एक PPE किट का दस हजार रुपये प्रतिदिन वसूल रहे हैं। हाल यह है कि अस्पताल खाली नहीं हैं और जहां भर्ती लेते भी हैं तो कम से कम पांच लाख रुपये तैयार रखिये, मरीज के बचने की गारंटी नहीं। दिल्ली सरकार ने आदेश निकाला हुआ है कि तीन लाख से कम में प्राइवेट अस्पताल में आपका इलाज नहीं करेंगे।

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कोरोना को लेकर भारतीय प्रयास पर भरोसा मुश्किल

भारत में भी कई संस्थाएंं दवा व वैक्सीन इजाद करने के प्रयास में हैं लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। पतंजलि ने दावा किया है कि उसकी दवा से एक हजार मरीज ठीक हुए हैं लेकिन खाद्य पदार्थों में उसकी स्तरीयता विवादित रही है इसलिए उस पर भरोसा कठिन है। उसने अपना परीक्षण इंदौर में किया है। दवा के साथ ही मदर डेयरी इम्युनिटी भी बेचने लगी है। हल्दी मिश्रित दूध उसने बाजार में लांच कर दिया है। याद करें चेचक महामारी का दौर जब कोरोना की तरह ही भयावह था और कोई दवा भी नही। लेकिन गाय पालने वालों को यह रोग नहीं हुआ। बाद में रिसर्च से पता चला कि गाय में एंटी बॉडी होने के कारण वे बच गये। अब शोधकर्ता इस ओर मुड़े हैं ताकि कुछ तो उपाय निकले।

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महाराष्ट्र के कोरोना मरीजों को अमेरिकी वैक्सीन का इंतजार

महाराष्ट्र में कोरोना उफान पर है। अंतत: वहां की सरकार ने अमेरिका में विकसित रेमेडेसीवीर वैक्सीन (Coronavirus vaccine) मंगाने की तैयारी की है। भारत में इसका पहली बार प्रयोग होगा। इसके निर्माण में बिल गेट्स की संस्था का भी योगदान है। मंहगी भी है। पता नहीं कि इससे कितने बचेंगे, कितने मरेंगे। इबोला, एचआईवी, एवियन इंफ्लूएंजा, सार्स, मर्स, एईएस आदि के टीके तो अब तक नहीं निकल सके हैं।

प्रयास लगातार लेकिन बाजार लूटने की मंशा

Coronavirus vaccine की दौड़ में ब्रिटिश-स्वीडिश फर्म एस्ट्राजेनेका सबसे आगे है। 120 से भी ज्यादा प्रतियोगियों में कम से कम 10 वैक्सीन ऐसी हैं जिनका क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। लेकिन इनमें मोडर्ना (Moderna) की MRNA-1273 और ऑक्सफोर्ड की AZD1222 सबसे आगे है। AZD1222 तो फेज 3 में एंटर कर चुकी है। उसके प्रॉडक्शन का जिम्मा ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) पर है।

जानकार बताते हैं कि मोडर्ना (Moderna) ओर एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) द्वारा बनाई गई वैक्सीन कोरोना वायरस पर आधारित नहीं है। इसे आम सर्दी-जुकाम देने वाले वायरस से बनाया गया है ओर मोडर्ना (Moderna) को MRNA वैक्सीन मैसेंजर RNA को लेकर बनाई जा रही है। MRNA बिल्कुल ही नयी तकनीक है। यह भी बिल गेट्स का परम सहयोगी है।

ब्रिटिश कम्पनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) ने अपनी अमेरिकी प्रतिद्वन्दी गिलीयड के साथ संभावित मर्जर के लिए संपर्क किया है। अगर ऐसा हुआ तो यह हेल्थकेयर सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी डील होगी। गिलियड वही कम्पनी है जो कोरोना की एकमात्र उपलब्ध दवाई रेमेडेसीवीर बनाई है, जिसके बिल गेट्स के साथ सीधे संबंध है।

एस्ट्राजेनेका की इस वैक्सीन के मामले में भी यही हुआ है। बनने से ही पहले इसके अनुमानित प्राथमिक प्रोडक्शन का एक तिहाई हिस्सा अमेरिका खरीद चुका है। अमेरिका ने अपने लिए 300 मिलियन खुराक सुनिश्चित कर ली हैं, यूके ने पहले ही इसकी 100 मिलियन खुराक सुरक्षित कर ली हैं।

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अजय वर्मा
अजय वर्मा
समाचार संपादक

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