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Saturday, July 24, 2021

नीतीश जी बचा लीजिए! कहीं राजनीति की भेंट न चढ़ जाए आपके सपनों का भातडाला पार्क

साल भर पहले की बात है "जल जीवन हरियाली" योजना के तहत ठाकुरगंज के ऐतिहासिक तालाब  भातडाला पोखर का जब जीर्णोद्धार हो रहा था तब तामझाम देख ऐसा लगा था मानो जमीन पर जन्नत उतर आया हो। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में ये लगता है कि ये मृगतृष्णा से ज्यादा कुछ नहीं था।

किशनगंजः साल भर पहले की बात है “जल जीवन हरियाली” योजना के तहत ठाकुरगंज के ऐतिहासिक तालाब भातडाला पोखर का जब जीर्णोद्धार हो रहा था तब तामझाम देख ऐसा लगा मानो जमीन पर जन्नत उतर आया हो। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में ये लगता है कि ये मृगतृष्णा से ज्यादा कुछ नहीं था।

Bhatdala Park
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़े ताम-झाम के साथ किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे महत्वकांक्षी योजना जल जीवन हरियाली के तहत 1 साल पहले ठाकुरगंज प्रखंड के ऐतिहासिक भातडाला पोखर का जीर्णोद्धार कर पार्क का निर्माण करोड़ों रुपये की लागत से कराया गया था। जनवरी 2020 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधिवत इसका उद्घाटन किया था। योजना को लेकर कई दिनों तक गहमा गहमी थी। निर्माण के लिए पदाधिकारियों ने खड़े-खड़े रात-दिन एक कर दिया था। लेकिन आज की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। योजना के तहत बनाये गए पार्क का हाल बदहाल है। साफ सफाई और रखरखाव के अभाव में पार्क में लगे पौधे सूखने के कगार पर हैं। ऐसा क्यों हुआ आगे पढ़िये पूरी खबर

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कैबिनेट का फैसला- 400 शहरी पार्क होंगे वन विभाग को हस्तांतरित

मुख्यमंत्री ने जब पार्क का उद्घाटन कर इसे आम जनता के लिए खोला तब नगरवासियों के बीच उत्साह और खुशी का माहौल था। पार्क के रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर पंचायत के कंधों पर थी। शुरुआती दिनों में नगर पंचायत ने पार्क का मेंटेनेस अच्छे तरीके से जारी रखा, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया पार्क के रखरखाव में अनियमितताएं आने लगी। इसी बीच 2021 के फरवरी महीने में नगर विकास मंत्रालय ने घोषणा की कि राज्य के तकरीबन 400 पार्कों को बेहतर रख-रखाव के लिए वन विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। लेकिन स्वामित्व नगर निकायों का ही होगा।

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दोषी कौन…नगर पंचायत या राज्य सरकार?

मार्च के महीने में कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी और पार्कों का ट्रांसफर का कार्य रुक गया। लेकिन यहां एक बात बताना जरूरी है कि राज्य सरकार ने अपने आदेश में यह साफ किया था कि लॉकडॉन के दौरान कृषि-बागवानी संबंधित कार्यों पर कोई रोक नहीं लगेगी। बावजूद इसके पार्क के पौधे रखरखाव का अभाव झेलने लगे। बड़ा सवाल यह है कि इस के लिए दोषी कौन है..? नगर पंचायत या फिर राज्य सरकार…

उद्घाटन के वक्त पार्क का मुआयना करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

सरकार के आदेश के बावजूद भी नहीं खुला भातडाला पार्क

अब बढ़ते है थोड़ा आगे जब राज्य में कोरोना का असर कम होने लगा तब राज्य सरकार ने धीरे-धीरे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी। अनलॉक 3 में सरकार ने राज्य के पार्कों को 12 बजे दिन तक खोले जाने का आदेश जारी कर दिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सरकार के आदेश के बावजूद भातडाला पार्क को जनता के लिए नहीं खोला जा रहा है।

पार्क के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी वन विभाग की- मुख्य पार्षद

इस बाबत जब हमने नगर के मुख्य पार्षद प्रमोद राज चौधरी से बात की तब उन्होंने बताया कि नगर विकास विभाग के आदेश के मुताबिक नगर पंचायत ठाकुरगंज ने पार्क का हस्तांतरण विगत 3 जुलाई को वन विभाग को कर दिया है। साथ ही उन्होंने बताया कि अब पार्क के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी वन विभाग की है। लॉकडाउन के दौरान पार्क के मेंटेनेंस के बाबत सवाल पूछने पर मुख्य पार्षद ने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ दिया।

जंगल में तब्दील होता भातडाला पार्क

वन विभाग के अधिकारी ने कहा पार्क हस्तांतरण प्रक्रिया नियमानुकूल नहीं

वहीं दूसरी और मुख्य पार्षद के दावों की पुष्टि के लिए जब हमने वन विभाग के अधिकारी को फोन लगाया तो उन्होंने साफ कहा कि पार्क के हस्तांतरण की प्रक्रिया मानक नियम के तहत  नहीं की गई है। जब तक नगर पंचायत समुचित प्रक्रिया के तहत पार्क का हस्तांतरण नहीं करता तब तक वन विभाग की पार्क को लेकर कोई जवाबदेही नहीं है।

जीर्णोद्धार से पहले भातडाला पोखर

पार्क की दुर्दशा के पीछे नगर पंचायत का मनमाना रवैया- सिकंदर पटेल

हमने इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर पटेल से भी बात की। सिकंदर पटेल ने कुछ ऐसी बाते बताई जिससे यह साफ हो गया कि कहीं न कहीं पार्क के बदहाली का कारण राजनीति भी है। सिकंदर पटेल ने नगर पंचायत के सर पर ठीकरा फोड़ते हुए बताया कि पार्क की दुर्दशा के पीछे नगर पंचायत का मनमाना रवैया है। उन्होंने बताया कि जब लॉकडाउन के दौरान पार्क की संरक्षण के अभाव में पार्क की दुर्दशा हो रही थी तब उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी के तहत समाज के कई लोगों के साथ मिलकर पार्क को साफ करने की कोशिश की लेकिन पार्क में तालाबंदी होने के कारण वो ऐसा नहीं कर पाए। उन्होंने नगर पंचायत पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि केवल राजनीतिक रोटी सेंकने और अपनी कमियों को छुपाने के लिए पार्क का ताला नगर पंचायत के द्वारा नहीं खोला गया।

स्थानीय लोगों को नहीं दी गई पार्क की साफ-सफाई की छूट

साथ ही सिकंदर पटेल ने बताया कि पार्क की साफ-सफाई हेतु समाज के लोगों के साथ मिलकर नगर पंचायत को आवेदन देने के बाद भी पार्क में सफाई अभियान चलाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। जबकि स्वामित्व नगर पंचायत के पास ही है।

बताते चलें की नगर पंचायत की और से हमें एक ईमेल का स्क्रीन शॉट भेजा गया है, जिसमें पार्क के हस्तांतरण की बात बताई जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि वन विभाग को भेजे गए इस मेल में 10 जुलाई का डेट अंकित है जबकि मुख्य पार्षद के अनुसार पार्क के ट्रांसफर संबंधित दस्तावेज 3 तारीख को ही दे दिया गया था।

अब इस मामले में कौन सच्चा है कौन झूठा ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा। लेकिन एक बात तो साफ है कि यह पार्क आपसी राजनीति की भेंट चढ़ता जा रहा है। आज जब पूरी दुनिया में पर्यावरण को लेकर बातें हो रही है वैसे में हमारी जिम्मेदारी है कि प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करें न कि उसे अपने सामने उजड़ता देखे। राजनीति करने के लिए कई मुद्दे है पर्यावरण के मामलों में एकजुटता दिखाकर सबको समाज और देश के सामने एक उदाहरण पेश करना चाहिए। क्योंकि याद रखिए पर्यावरण से हम हैं हमसे पर्यावरण नहीं।

अभय पाण्डेय
आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

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