29 C
New Delhi
Thursday, May 6, 2021

लॉकडाउन: राज्यों को अधिकार देने से कोरोना ने जीना किया मुहाल ?

कोरोना संकट भी कैसी आपदा है। इसने आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। मगर एक बात बार बार मेरे मन को परेशान करती है जिसके बारे में लोगों को चिंतन अवश्य करना चाहिए कि ऐसे कौन से कारण थे कि पहले तो केंद्र सरकार को लॉकडाउन लगाने में देरी करनी पड़ी?

इसके बाद स्वघोषित कर्फ्यू लगा पड़ा और अचानक पूरे देश को लॉकडाउन में झौंक दिया गया। दो महीने से अधिक वक्त तक पूरा देश लॉकडाउन में रहा जिसकी बागडोर केंद्र सरकार के हाथों में थी। इसके बाद भी जब मरने वालों का सिलसिला नहीं रूका और मरीजों की संख्या में इजाफा होता रहा तब राज्य सरकार की “आज्ञाकारी” केंद्र सरकार ने अचानक 31 मई के बाद अनलॉक करने का निर्णय ले लिया और लॉकडाउन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकारों को दे दिया।

Advertisement

अब एक बार फिर देश की राजधानी में लॉकडाउन लगाने की सुगबुगाहट तेज हो गयी है। इसका सबसे बड़ा कारण दिल्ली में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि है। हालांकि, दिल्ली के निजी अस्पतालों की बजाय सरकारी अस्पतालों और इनके कोरोना वारियर्स की तारीफ की जानी चाहिए।

Advertisement

अनलॉक के निर्णय से पहले केंद्र सरकार को यह विचार अवश्य करना चाहिए था कि लॉकडाउन के दरम्यान देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या का प्रतिशत भी काफी कम थी और कोरोना को लेकर भारत सरकार की विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी तारीफ की थी।

कहीं केंद्र सरकार की मंशा प्रदेश सरकारों के सिर पर कोरोना का ठीकरा फोड़ना तो नहीं था? कहीं केंद्र की भाजपा सरकार का ध्यान आने वाले महीनों में कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर तो नहीं?

कुछ भी हो केंद्र को वैश्विक स्वास्थ्य आपदा के वक्त कमान अपने हाथों में रखनी चाहिए थी। इससे मरीजों की संख्या में एक जून के बाद से हुआ इजाफा नहीं होता और स्थिति नियंत्रण में रहती।

दीपक सेन
दीपक सेन
मुख्य संपादक

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लेटेस्ट अपडेट

error: Content is protected !!