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Friday, September 24, 2021

ललन-आरसीपी की लड़ाई अब शक्ति प्रदर्शन पर आई, नीतीश की चुप्पी मजबूरी?

पटनाः जदयू के दो दिग्गज ललन सिंह और आरसीपी सिंह के बीच की लड़ाई और तेज हो गई है। बात अब सिर्फ बयानबाजी तक ही नहीं, बल्कि एक दूसरे के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन पर जा पहुंची है। पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद ललन सिंह की पहली बिहार यात्रा पर उनके गुट ने स्वागत के बहाने शक्ति प्रदर्शन किया और फिर सोमवार को केंद्रिय मंत्री चुने जाने के बाद पहली बार पटना पहुंचे RCP सिंह के गुट ने। कहा जा रहा है कि महत्वाकांक्षा को लेकर दोनों के बीच इन दिनों सियासी तनाव चरम पर है और पार्टी दो गुटों में बंट गई है।

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चुप रहना नीतीश की मजबूरी है?

इधर दोनों के बीच के टकराव और शक्ति प्रदर्शन पर बिहार की सियासत में चर्चा का बाजार गर्म है, लेकिन नीतीश कुमार बिल्कुल चुप हैं। वो ना तो ललन सिंह से कुछ कह पाने की स्थिति में हैं और ना आरसीपी से। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो नीतीश के सामने दुविधा वाली स्थिति है, वह मजबूर हैं। वह कुछ भी बोलने इस लिए परहेज कर रहे हैं कि एक राजदार है, तो दूसरा पुराना साथी। हालांकि, पीछले दिनों दबाव में आकर नीतीश ने मुंह खोला था और साफ किया था कि जदयू में कोई विवाद नहीं है, पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने पोस्टर प्रकरण पर का था कि कुछ लोगों को केवल पोस्‍टर लगवाने का शौक रहता है। उन्‍हें इस बात से कुछ मतलब नहीं रहता है कि पोस्‍टर में आखिर छप क्‍या रहा है।

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क्यों पड़ी शक्ति प्रदर्शन की जरूरत

अब सवाल यह उठता है कि दोनों को एक दूसरे के सामने शक्ति प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ी, तो इसके लिए आपको फ्लैशबैक में जाना होगा। दरअसल, तनाव की यह कहानी शुरू होती है 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद, जब चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने से चूक गई जदयू में बड़ा फेदबदल हुआ। नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से स्तिफा देते हुए अपने बेहद करीबी माने जाने वाले आरसीपी सिंह को वह पद सौंप दिया।

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वैसे तो नीतीश के करीबी होने के कारण RCP का कद पार्टी में पहले भी बहुत बड़ा था और एक तरह से वह नीति निर्णायक भी थे, लेकिन नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कद और भी बड़ा हो गया। यह बात ललन सिंह को नागवार गुजरने लगी, क्योंकि वो JDU और नीतीश दोनों के पुराने संगी है। यह बात अलग है कि ललन सिंह ने कभी इसका अभाष भी नहीं होने दिया। शायद ललन सिंह को उम्मीद थी कि जब केंद्र में मोदी मंत्रीमंडल का विस्तार होगा तो उन्हें मंत्री पद मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहां भी बाजी RCP ही मार गए। उन्हें मोदी कैबिनेट में इस्पात मंत्री का दर्जा मिल गया।

ललन सिंह को लेकर पार्टी में उठने लगी आवाज

RCP को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने पर पार्टी के अंदर थोड़ा सा तनाव दिखा, लेकिन डैमेज कंट्रोल के माहिर नीतीश ने यह कह कर स्थिति संभाल लिया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते RCP ने अपने मंत्री पद का प्रस्ताव खुद भेजा है। उन्हें मंत्री बनाए जाने में नीतीश कुमार को कोई रोल नहीं है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। ललन सिंह को नज़रअंदाज करने को लेकर बिहार की एक जाति गोलबंद होने लगी। पार्टी में भी दबी जुबान इस बात की चर्चा होने लगी कि ललन सिंह के साथ नाइंसाफी हो रही है।

नीतीश को फिर से डैमेज कंट्रोल में जुटना पड़ा, इस बार उन्होंने RCP की जगह ललन सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का ऐलान कर दिया। यहीं बात RCP के समर्थकों को चुभ गई। समर्थक नहीं चाहते थे कि RCP अध्यक्ष पद से हटाए जाएं। लेकिन नीतीश कुमार की मौजूदगी में जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आरपीसी सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा की और इसके बाद नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रकिया शुरू की हुई। आरसीपी ने ही ललन सिंह के नाम का प्रस्ताव रखा और वशिष्ठ नारायण सिंह, केसी त्यागी सरीखे नेताओं ने इसका समर्थन किया। सर्वसम्मति से 31 जुलाई को ललन सिंह उनकी जगह पार्टी के मुखिया बना दिए गए।

ललन और आरसीपी में चालु हुआ पोस्टरवार

यहां तक जो कुछ भी चला वह आम बात है, लेकिन पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जब 6 अगस्त को ललन सिंह पटना पहुंचे, तो उनके स्वागत में जिस तरह से शहर में पोस्टर लगे और हवाई अड्डे से लेकर पार्टी के प्रदेश कार्यालय तक भीड़ उमड़ी उसने एक बड़ी लकीर खींच दी। जब आरसीपी सिंह 16 अगस्त को पटना आने वाले रहे थे, तो उनके स्वागत में भी तैयारी जोर-शोर हुई। पटना कई हिस्सों को पोस्टर-बैनर से पाट दिया गया था। उन में पार्टी दफ्तर के बाहर जो पोस्टर लगाए गये थे उन में ललन सिंह की तस्वीर और नाम दोनों ही गायब थे जिससे अंदर की कलह सरेआम हो गई। हालांकि, जब मामले ने तुल पकड़ा तो बाद में पोस्टर हटवा दिया गया और उसे लगाने वाले ने माफी भी मांग ली।

आरसीपी सिंह ने सफाई दी और कहा कि जेडीयू में ना कोई गुटबाजी है ना कलह। पार्टी का नाम ही जनता दल यूनाइटेड है ऐसे में कलह का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। लेकिन इसमें भी उनका एक बयान द्विअर्थी रहा जिसमें उन्हों ने साफ कहा कि जेडीयू में मुख्यमंत्री नितीश कुमार ही एकमात्र नेता हैं। बाकी सभी लोग उनके सहयोगी की भूमिका में हैं।

अभय पाण्डेय
आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

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