One Nation One Registration से लगेगी जमीन संबंधी विवादों पर रोक

नई दिल्लीः देश में जमीन संबंधी विवादों की बढ़ती संख्या पर काबू पाने के लिहाज से केंद्र सरकार ने आम बजट में महत्वपूर्ण प्रवधान किए हैं। सरकार ने विवादों पर रोक लगाने के लिए ‘वन नेशन-वन रजिस्ट्रेशन’ (One Nation One Registration) का प्रावधान किया हैं। यह प्रावधान भूमि सुधार की दिशा में काफी कारगर साबित होगा और आम आदमी को भी बेवजह के जमीन संबंधी विवादों से राहत मिल सकेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि इससे शहरी व ग्रामीण दोनों जगहों पर भूमि की अपनी अलग पहचान निश्चित की जाएगी।

‘One Nation One Registration’ का प्रावधान देशभर में लागू हो, इसके लिए राज्य भी सहमत हो चुके हैं। इस बाबत एक खास सॉफ्टवेयर से National Generic Document Registration System (NGDRS) को जोड़ दिया जाएगा। देश के ज्यादातर राज्यों में भूमि दस्तावेजों (Land Records) का कंप्युटरीकरण का काम पूरा हो चुका है। उन्हें अब सूचना प्रौद्योगिकी (IT) से लिंक कर दिया जाएगा। इसके लिए डिजिटलीकरण के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 6.58 लाख गांव हैं जिनमें से 5.98 लाख गांवों की जमीनों का कंप्यूटरीकरण हो चुका है।

भूमि संसाधनों के प्रभावी उपयोग की अनिवार्यता को लेकर सरकार सतर्क है और राज्यों को भी इसके लिए तैयार किया जा रहा है। इसके पहले चरण में राज्यों के भू अभिलेखों को डिजिटलाइज किया जा रहा है, जो लगभग अंतिम चरण में है। भूमि के प्रत्येक टुकड़े को Unique Land Parcel Identification Number से लैस कर दिया जाएगा। संविधान में भूमि राज्य का विषय होने की वजह से इसके लिए राज्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

One Nation One Registration से होंगे ये फायदे

संविधान के 8वीं अनुसूची में दर्ज सभी भाषाओं में भूमि दस्तावेजों की नकल भी प्राप्त की जा सकती है। इस प्रणाली के पूरी तरह संचालित होने के बाद देश के किसी भी हिस्से में होने वाला बैनामा में घपले की आशंका नहीं होगी। जमीन के टुकड़े अथवा खेत का फर्जी बैनामा अथवा कई लोगों को एक साथ नहीं किया जा सकेगा। रजिस्ट्रेशन की समान प्रणाली पूरे देश में लागू होने से जमीन संबंधी विवादों को सीमित करने में मदद मिलेगी। डिजिटलीकरण के बाद कहीं की भी जमीन को आनलाइन देखा जा सकेगा। प्रिंट निकालकर उसकी नकल प्राप्त की जा सकेगी। डिजिटलीकरण से बैनामा कराने से पहले संबंधित जमीन के मालिकाना हक की भी जांच की जा सकेगी।

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