लॉकडाउन के बाद अनलॉक वन में लापरवाही बढ़ी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली: कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 6वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया। 16 मिनट तक चले इस संबोधन में उन्‍होंने कोरोना संक्रमण, अनलॉक में बरती जा रही लापरवाहियों से लेकर जनकल्‍याणकारी योजनाओं, त्‍योहारों के सीजन और वर्तमान चुनौतियों आदि का जिक्र किया। अपने संबोधन में उन्‍होंने मुख्‍य घोषणा ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के विस्‍तार को लेकर की। यह योजना अब दीवाली और छठ पूजा यानी नवंबर महीने के अंत तक चलाई जाएगी। पिछले संबोधनों की तुलना में प्रधानमंत्री का यह संबोधन संक्षिप्‍त था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा कि लॉकडाउन के दौरान नियमों का गंभीरता से पालन किया गया। लेकिन अनलॉक वन में व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार में लापरवाही बढ़ती चली जा रही है। प्रधानमंत्री ने देश के नाम संदेश में कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु दर को देखें तो दुनिया के अनेक देशों की तुलना में भारत संभली हुई स्थिति में है। समय पर किए गए लॉकडाउन और अन्य फैसलों ने भारत में लाखों लोगों का जीवन बचाया है। लेकिन हम यह भी देख रहे हैं कि जब से देश में अनलॉक वन हुआ है, तब से व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार में लापरवाही भी बढती ही चली जा रही है।

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उन्होंने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ते हुए अब हम अनलॉक दो में प्रवेश कर रहे हैं। बरसात के मौसम में सर्दी-जुखाम और खांसी-बुखार के मामले बढ़ जाते हैं। ऐसे वक्त में ज्यादा सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान बहुत गंभीरता से नियमों का पालन किया गया था। अब राज्य सरकारों, स्थानीय निकाय की संस्थाओं, देश के नागरिकों को फिर से सत​र्कता दिखाने की जरूरत है। विशेषकर कन्टेनमेंट जोंस पर बहुत ध्यान देना होगा।

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गांव का प्रधान या प्रधानमंत्री कोई भी नियमों से ऊपर नहीं

उन्होंने कहा कि आपने खबरों में देखा होगा। एक देश के प्रधानमंत्री पर 13 हजार रुपए का जुर्माना इसलिए लग गया, क्योंकि वो सार्वजनिक जगह पर बिना मास्क पहने गए थे। भारत में भी स्थानीय प्रशासन को इसी चुस्ती से काम करना चाहिए। ये 130 करोड़ देशवासियों के जीवन की रक्षा करने का अभियान है।

उन्होंने कहा कि भारत में गांव का प्रधान हो या देश का प्रधानमंत्री कोई भी नियमों से ऊपर नहीं है। लॉकडाउन होते ही सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना लेकर आई। इस योजना के तहत गरीबों के लिए पौने दो लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु ​के दौरान और उसके बाद मुख्य तौर पर कृषि क्षेत्र में ही ज्यादा काम होता है। जुलाई से धीरे-धीरे त्योहारों का भी माहौल बनने लगता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार अब नवंबर महीने के आखिर तक कर दिया जाए। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के इस विस्तार में 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे।

उन्होंने कहा कि पूरे भारत के लिए एक राशन-कार्ड की व्यवस्था भी हो रही है। गरीब और ज़रूरतमंद को सरकार अगर मुफ्त अनाज दे पा रही है तो इसका श्रेय दो वर्गों को जाता है। हमारे देश के मेहनती किसान और हमारे देश के ईमानदार टैक्सपेयर।

उन्होंने कहा कि हम सारी एहतियात बरतते हुए Economic Activities को और आगे बढ़ाएंगे। हम आत्मनिर्भर भारत के लिए दिन रात एक करेंगे। हम सब लोकल के लिए वोकल होंगे।

दीपक सेन
मुख्य संपादक

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