राहुल का मोदी सरकार पर हमला, विदेश नीति और आर्थिक मामले में कमजोर हुआ देश

न्यूज़ डेस्क
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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल ने सरकार की विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और पड़ोसियों के साथ संबंध पर सरकार को घेरा है। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राहुल के सवालों का जवाब दिया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वीडियो संदेश के जरिये शुक्रवार को भारत और चीन विवाद को लेकर एक वीडियो ट्वीट किया। इस वीडियो में राहुल गांधी बेबाकी से अपनी राय रख रहे हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस वीडियो में अर्थव्यवस्था, पड़ोसियों के साथ संबंध और विदेश नीति पर खुलकर अपनी बात रखी। राहुल ने कहा कि सवाल उठता है कि आखिरकार चीनियों ने यही वक्त क्यों चुना?

चीन ​के हमले पर उठाये सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि अभी भारत की क्या स्थिति है, जो चीन को ये कदम उठाने की इजाजत मिल गई? ऐसा क्या हो गया कि चीन को विश्वास हो गया कि वो ऐसा कदम उठा सकता है?

अपने वीडियो संदेश में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले को समझने के लिए कई चीजों को समझना होगा, देश की रक्षा मुख्य रूप से विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और लोगों के विश्वास पर टिकी है। लेकिन पिछले 6 साल में इन हर मामलों में देश फेल हुआ है।

मोदी सरकार की विदेश नीति की आलोचना

विदेश नीति पर राहुल ने कहा कि पहले हमारा अमेरिका, रूस, यूरोप समेत लगभग हर देश से अच्छे रिश्ते थे। मगर आज हमारा यह रिश्ता सिर्फ व्यापार का रह गया है। रूस के साथ संबंध खराब हुए हैं। पहले नेपाल, भूटान, श्रीलंका हमारे दोस्त थे। पाकिस्तान से अलग सभी पड़ोसी हमारे साथ काम कर रहे थे। मगर आज हर कोई हमारे खिलाफ बात कर रहा है।

राहुल ने कहा कि अर्थव्यवस्था कभी हमारी ताकत होती थी। मगर आज बेरोजगारी अपने चरम पर है। छोटे कारोबारी मुश्किल में है, लेकिन सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है।

उन्होंने कहा कि अगर आप एक देश के तौर पर सोचते हो तो हर चीज मायने रखती है। अगर अर्थव्यवस्था में पैसा नहीं डाला गया तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। और अब वही हो रहा है।

विदेश मंत्री ने दिया राहुल को जवाब

वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिलसिलेवार ट्वीट कर राहुल गांधी को जवाब दिया। विदेश मंत्री ने कहा, ‘राहुल गांधी ने विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। उसके कुछ उत्तर यहां दिए जा रहे हैं।’

एस. जयशंकर ने कहा, ‘हमारे प्रमुख साझेदार मजबूत हैं। अमेरिका, रूस, यूरोप और जापान से मिलने और औपचारिक बैठकों का दौर चलता रहता है। भारत राजनीतिक रूप से अधिक समान शर्तों पर चीन से रिश्ता रखता है। विश्लेषकों से पूछ लीजिए।’

विदेश मंत्री ने कहा, ‘और पाकिस्तान (जिसे आपने छोड़ दिया) निश्चित रूप से बालाकोट और उरी के बीच अंतर को देख सकते हैं। और दूसरी ओर शर्म-अल-शेख, हवाना और 26/11 है।’

अफगानिस्तान, भूटान और बांग्लादेश का जिक्र

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जिनमें सलमा डैम, संसद निर्माण शामिल है। ट्रेनिंग और कनेक्टविटी पर काम तेज है।

एस जयशंकर ने कहा, ‘भूटान को सुरक्षा और विकास के लिहाज से एक मजबूत साझेदार मिला है। और 2013 के उलट वो रसोई गैस की चिंता नहीं करते हैं।’ उनके घरों से पूछिए। विदेश मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश के साथ बाउंड्री का मामला सुलझ गया। इससे विकास का रास्ता खुला है।

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