बताओ सरकार! चुनाव में अमेरिका की बराबरी, तो सुविधाओं में पीछे क्यों बिहार ?

कोरोना विस्फोट के बीच बिहार विधानसभा के चुनाव को लेकर घमासान मचा है। सत्ता पक्ष यानी भाजपा-जदयू समय पर ही चुनाव के पक्ष में हैं, तो तकरीबन सभी विपक्षी दल विरोध में। विरोध में राजग का एक घटक लोजपा भी है।

पटनाः कोरोना विस्फोट के बीच बिहार विधानसभा के चुनाव को लेकर घमासान मचा है। सत्ता पक्ष यानी भाजपा-जदयू समय पर ही चुनाव के पक्ष में हैं, तो तकरीबन सभी विपक्षी दल विरोध में। विरोध में राजग का एक घटक लोजपा भी है।

जदयू को कोरोना से ज्यादा चुनाव की चिंता

चुनाव समय पर कराने की चिंता सबसे ज्यादा जदयू को है। पार्टी के शीर्ष नेता के.सी.त्यागी ने तो यहां तक तर्क दिया है कि इसी संकटकाल में जब अमेरिका में चुनाव हो सकता है, तो बिहार में क्यों नहीं? लेकिन वे इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते कि अमेरिका की हेल्थ फैसिलीटी का एक फीसद भी बिहार में है या नहीं?

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मार्च में लॉकडाउन कर के केंद्र ने सरकारों को हेल्थ फैसिलीटी दुरुस्त करने का वक्त दिया लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आज सभी अस्पतालों की हालत दयनीय है। संक्रमित भी बिना चिकित्सा के मर रहे हैं। अस्पताल मरीजों को भर्ती करने से कन्नी काट रहे हैं। गृह सचिव से लेकर कुछ डीएम तक इलाज करा रहे हैं।

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भागलपुर और पटना तो बुरे दौर में है। आइसोलेशन वार्ड में रेप की घटना हो चुकी है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की इसी लाचारी को देख केंद्र का दल  बिहार पहुंचा है। माना जा रहा है कि कोरोना यहां पीक पर है। शायद स्टेज चार पर। ऐसे में बड़े पैमाने पर चुनावकर्मियों की तैनाती, उनका प्रशिक्षण, बूथों पर वोटरों के बीच दो फीट की दूरी का पालन आदि क्या संभव हे?

जदयू को चुनाव टालने में सत्ता गंवाने का खतरा लग रहा है। भाजपा एकदम खामोश और चुनाव आयोग की मर्जी मानने को रजामंद लग रही है।हालात यह है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती के बदले आईपीएस की तैनाती का फैसला लिया गया है।

विरोधी दलों के पास मानवीय बहाना

उधर विरोधी दलों के साथ-साथ लोजपा भी चुनाव कराने के खिलाफ है। ये मानवता दिखाते हुए कहते हैं कि लाशों के ढेर पर चुनाव कराना नाजायज होगा। चुनाव आयोग ने वैसे सभी दलों से वर्तमान परिदृश्य में संभावित चुनाव पर इस माह के अंत तक राय मांगी है, जिसके बाद ही फैसला होगा।

मान लीजिए कि किसी बूथ पर एक हजार से अधिक वोटर हों और सब आ जायें तो दो फीट की दूरी का पालन कैसे होगा? ऐसे ही सो तरह के प्रश्न हैं जिनका उत्तर किसी के पास नहीं है। वैसे पक्षधरों का दावा है कि विरोधी दलों के पास तैयारी ही नहीं हैं जिसके लिए वे कोरोना के बहाने समय चाह रहे हैं।

विपक्ष के दावे में दम

कोरोना को लेकर विपक्ष के दावों से इनकार नहीं किया जा सकता। चुनाव हुए तो संक्रमण के डर से वोटरों की भागीदारी में भारी गिरावट हो सकती है। आयोग की पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक ही सामान्य माहौल में भी शत-प्रतिशत वोटिंग नहीं हुई है। उसके मुताबिक 2015 में 56.8%, 2010 में 52.7%, 2005 में 45.9% और 2000 में 62.6% वोट पड़े। फिर कोरोना काल में कितने प्रतिशत वोट पड़ेंगे, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

 बिहार में कोरोना

  1. बिहार की कुल आबादी- लगभग 12.6 करोड़
  2. https://www.covid19india.org/ के मुताबिक बिहार में कोरोना स्थिति-
  • कन्फर्म केस- 27,455
  • सक्रिय केस- 9,732
  • रिकवर्ड केस- 17,535
  • मौत के मामले- 187
3. बिहार में कोविड अस्पतालों की संख्या- 4
  • AIIMS, पटना
  • NMCH, पटना
  • JLMNCH, भागलपुर
  • ANMMCH, गया

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अजय वर्मा
समाचार संपादक

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