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Thursday, May 6, 2021

क्या है बीजेपी-फेसबुक विवाद जिसने देश की सियासत में हडकंप मचा दी ?

नई दिल्ली: एक अमेरिकी अखबार में बीजेपी-फेसबुक को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट पर भारतीय राजनीतिक गलियारे और सोशल मीडिया की दुनिया में जंग छिड़ गई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद देश की सियासत में हड़कंप मच गया है। आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक विदेशी अखबार के लेख का हवाला देते हुए रविवार को बीजेपी (BJP) और आरआरएस (RSS) पर भारत में फेसबुक (Facebook) और व्हॉट्सएप (Whatsapp) पर नियंत्रण करने का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “भारत में फेसबुक और व्हॉट्सएप पर बीजेपी और आरएसएस का कब्जा है। ये इसके जरिये फेक न्यूज और नफरत फैलाते हैं। वे चुनाव को प्रभावित करने में भी इनका इस्तेमाल करते हैं। आखिरकार, अमेरिकी मीडिया में फेसबुक के बारे में सच बाहर आ गया।”

रिपोर्ट में क्या है, जिससे हुआ विवाद

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में ‘फेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स’ हेडिंग से प्रकाशित रिपोर्ट से पूरा विवाद खड़ा हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि फेसबुक भारत में सत्तारूढ़ बीजेपी नेताओं के भड़काऊ भाषा के मामले में नियम कायदों में ढील बरतता है।

फेसबुक कर्मचारियों का कहना था कि भारत में ऐसे कई लोग हैं जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नफरत फैलाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्चुअल दुनिया में नफरत वाली पोस्ट करने से असली दुनिया में हिंसा और तनाव बढ़ता है।

राहुल पर बोला रविशंकर प्रसाद ने हमला

बीजेपी नेता एवं संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया। रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, ‘जो लूजर स्वयं अपनी पार्टी में भी लोगों को प्रभावित नहीं कर सकते वे इस बात का हवाला देते रहते हैं कि पूरी दुनिया को बीजेपी-आरएसएस नियंत्रित करती है।’

राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वो कहते रहते हैं कि पूरी दुनिया बीजेपी और आरएसएस से नियंत्रित है। चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाते हुए आप रंगे हाथ पकड़े गए थे। कैंब्रिज एनालिटिका, फेसबुक से आपका गठजोड़ पकड़ा गया। ऐसे लोग आज बेशर्मी से सवाल खड़े करते हैं।

रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘तथ्य यह है कि आज सूचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। यह अब आपके परिवार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है और इसलिए आपको दुख होता है। खैर आपने बेंगलुरु हिंसा की निंदा नहीं की। आपकी हिम्मत कहां चली गई।’

बीजेपी कैम्ब्रिज एनेलिटिका की क्लाइंट रही?

रविशंकर प्रसाद के ट्वीट पर कांग्रेस ने पलटवार किया। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि झूठे ट्वीट और झूठा एजेंडा ही एकमात्र रास्ता बन गया है। कांग्रेस ने कभी कैम्ब्रिज एनेलिटिका की सेवाएं नहीं लीं।’

सुरजेवाला ने दावा किया कि बीजेपी कैम्ब्रिज एनेलिटिका की क्लाइंट रही है। कानून मंत्री यह क्यों नहीं बताते कि भारत में सिर्फ कांग्रेस-बीजेपी में सियासी वॉर ही नहीं जारी है बल्कि राजनीतिक दलों के नेताओं ने फेसबुक की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंखी दास की नियुक्ति को लेकर प्रश्न

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में कहा, ‘मार्क जकरबर्ग कृपया इस पर बात करें। प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक अंखी दास को फेसबुक में नियुक्त किया गया जो खुशी-खुशी मुस्लिम विरोधी पोस्ट को सोशल मीडिया पर अप्रूव करता है। आपने साबित कर दिया कि आप जो उपदेश देते हैं उसका पालन नहीं करते।’

वहीं एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘अलग-अलग लोकतंत्र में फेसबुक के अलग-अलग मानक क्यों हैं? यह किस तरह का निष्पक्ष मंच है? यह रिपोर्ट बीजेपी के लिए नुकसानदेह है। बीजेपी के फेसबुक के साथ संबंधों का खुलासा हो गया है और फेसबुक कर्मचारी पर बीजेपी के नियंत्रण की भी प्रकृति सामने आई है।’

फेसबुक की सफाई

भारत में उठ रहे सवालों के बीच फेसबुक ने रविवार को कहा, ‘हम हेट स्पीच और ऐसी सामग्री पर बंदिश लगाते हैं जो हिंसा को भड़काता है। हम ये नीति वैश्विक स्तर पर लागू करते हैं। हम किसी की राजनीतिक स्थिति या जिस भी पार्टी से नेता संबंध रख रहा, नहीं देखते हैं।’

फेसबुक के प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘हम जानते हैं कि हेट स्पीच एवं भड़काऊ कंटेंट को रोकने पर और ज्यादा काम करने की जरूरत है। हम आगे बढ़ रहे हैं। निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी प्रक्रिया का नियमित ऑडिट करते हैं।’

हिंसा की वकालत

अखबार ने तेलंगाना से बीजेपी सांसद टी राजा सिंह की एक पोस्‍ट का जिक्र किया है। पोस्ट में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा की वकालत की गई है। रिपोर्ट को फेसबुक के कर्मचारियों से बातचीत के हवाले से लिखी गई है। फेसबुक कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने टी राजा सिंह की पोस्‍ट का विरोध किया था और इसे कंपनी के नियमों के खिलाफ माना था, लेकिन कंपनी के भारत में टॉप लेवल पर बैठे अधिकारियों ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया था।

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब फेसबुक को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने उन पांच बातों के उल्लेख के साथ एक रिपोर्ट में बताया कि फेसबुक के नेटवर्क और डेटा का इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी मुहिम को बढ़ावा देने के लिए किया गया था।

अंखी दास ने लिखाई शिकायत दर्ज करायी

फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अंखी दास ने धमकी देने के मामले में दिल्ली पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई है। अंखी दास का कहना है कि उन्होंने उन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है जिन्होंने उन्हें धमकी दी है।

वहीं साउथ दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अंखी दास की शिकायत मिली है और इस मामले में जांच की जा रही है। हालांकि, डीसीपी ने बताया कि इस मामले में अभी FIR दर्ज नहीं गई है।

शिकायत में अंखी दास ने कहा है कि ऑनलाइन पोस्टिंग/कंटेंट के जरिये उनके जीवन और हिंसा का खतरा है। शिकायत में कुछ ट्विटर और फेसबुक हैंडल का जिक्र किया गया है, जहां से उन्हें धमकी मिली है। अंखी दास ने दिल्ली पुलिस में यह शिकायत उस समय दी है जब फेसबुक को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है।

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