पटनाः लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के सचेतक विधायक राजू तिवारी ने भरत तिवारी की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। राजू तिवारी ने कहा है कि भरत तिवारी जैसे होनहार और समाज के प्रति निःस्वार्थ समर्पित युवक की इस तरह मौत होना बेहद दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने जवान बेटे को इस तरह खोना असहनीय त्रासदी है और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
न्याय का भरोसा, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
राजू तिवारी ने कहा कि भरत तिवारी के परिवार को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें कानून के तहत सख्त सजा मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर पीड़ित परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए सवाल
राजू तिवारी ने इस पूरे मामले को लेकर बड़ा सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब पुलिस ने खुद अपने स्तर पर भरत तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हालात आखिर इस मोड़ तक कैसे पहुंचे। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशीलता, धैर्य और विशेष प्रोटोकॉल के साथ कार्रवाई होनी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है, जो यह दिखाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। लेकिन पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
गांव में अब भी गुस्सा कायम
भरत तिवारी की मौत अब सिर्फ पुलिस फायरिंग की एक घटना भर नहीं रह गई है। इस घटना ने पूरे भोजपुर में भावनात्मक, सामाजिक और राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। बिलौटी गांव में पिछले कुछ दिनों से शोक, आक्रोश और सियासी गतिविधियों का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि भरत की मानसिक स्थिति से पूरा गांव परिचित था। ऐसे में उसकी मौत ने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस भरोसे पर चोट है जो लोग सिस्टम से रखते हैं।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
भरत तिवारी की अंतिम यात्रा इस पूरे मामले का सबसे भावुक दृश्य बनकर सामने आई। बड़ी संख्या में लोग उसकी अर्थी में शामिल हुए। गांव, आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों के अलावा बड़ी संख्या में आम लोग भी अंतिम विदाई देने पहुंचे।
अर्थी जुलूस में उमड़ी भीड़ और लोगों की भावनाएं यह बता रही थीं कि जनमानस इस घटना को एक साधारण पुलिस कार्रवाई की तरह नहीं देख रहा। जिस सम्मान और संवेदना के साथ भरत को विदाई दी गई, उसने साफ कर दिया कि गांव का एक बड़ा तबका उसे अपराधी नहीं, बल्कि एक पीड़ित के रूप में देख रहा है।
न्याय और जांच पर टिकी निगाहें
राजनीतिक बयान, जनसैलाब और परिवार का दर्द-इन सबके बीच यह साफ है कि यह मामला अभी थमा नहीं है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच और न्याय की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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