Tuesday, March 17, 2026

ब्रेन हेल्थ पर मेडिटेशन के फायदे, जानिए क्या कहता है विज्ञान

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नई दिल्ली: वर्तमान दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने का समय भी लोगों के पास नहीं है। ऐसे में थोड़ी देर मेडिटशन लगाना आपको राहत दे सकता है। प्रतिदिन मेडिटेशन करने वाले लोगों की मेंटल हेल्थ सही रहती है। मेडिटेशन शरीर और मन दोनों को एक्टिव रखता है।

एक रिसर्च बताती हैं कि मेडिटेशन करने से मस्तिष्क की तरंगों के स्वरूप को अल्फा स्तर पर ले जाता है। मस्तिष्क पहले से अधिक सक्रिय और एकाग्र हो जाता है। मेडिटेशन करने से व्यक्ति अपने किसी भी काम को पूरे फोकस के साथ कर सकते हैं। मेडिटेशन के कारण शरीर में सार्थक बदलाव होते हैं। शरीर की प्रत्येक सेल्स ऊर्जा से लैश हो जाती है।

सहूलियत के हिसाब से विपश्यना मेडिटेशन (Vipassana meditation), आध्यात्मिक मेडिटेशन (Spiritual meditation), फोकस्ड मेडिटेशन (Focused meditation), गूढ चिंतन (Transcendental meditation), मंत्र मेडिटेशन (Mantra meditation) और गतिमान मेडिटेशन (Movement meditation) में से कोई भी एक को व्यक्ति चुन सकते हैं।

डायबिटीज और हाई ब्ल्ड प्रेशर जैसी बीमरियों से लड़ने में मदद मिलती है

मेडिटेशन संबंधी रिसर्च बताती है कि इससे मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है। डिप्रेशन के लक्षण को कम करता है। डायबिटीज और हाई ब्ल्ड प्रेशर जैसी बीमरियों से लड़ने में मदद मिलती है। स्मोकिंग और नशा करने की आदत से छुटकारा मिल सकता है। नकारात्मक विचारों से छुटकारा मिलता है। सिरदर्द से छुटकारा मिलता है और याददाश्त तेज होती है।

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मेडिटेशन के लगातार अभ्यास से एंजाइटी में कमी

विज्ञान के मुताबिक मेडिटेशन से शरीर से कोर्टिकल नामक हार्मोन का स्राव सही मात्रा में होता है, जिससे हमारा दिमाग शांत रहता है और स्ट्रेस और टेंशन दूर होती है। मनोवैज्ञानिक बीमारियों जैसे डिमेंशिया, अवसाद, ओसीडी और सिजोफ्रेनिया होने की संभावना कम होती है। मेडिटेशन मस्तिष्क को एक प्रकार से पोषण प्रदान करता है। जब भी आप चिंतित, अस्थिर और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब मेडिटेशन आपको शांत और सकारात्मक रखता है। मेडिटेशन के लगातार अभ्यास से एंजाइटी कम होना, पॉजिटिव विजन, क्रिएटीविटी में वृद्धि, प्रसन्नता में संवृद्धि, मेंटल पीस और अनिद्रा में कमी देखने को मिलते हैं।

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Yoga Of Immortals (YOI) के संस्थापक ईशान शिवानंद के अनुसार मेडिटेशन मस्तिष्क को शार्प बनाता है और रिलेक्स कर उसे विस्तार करता है। बिना विस्तारित हुए एक कुशाग्र बुद्धि क्रोध, तनाव व निराशा का कारण बनती है। एक विस्तारित चेतना बिना कुशाग्रता के अकर्मण्य अवस्था की ओर बढ़ जाती है।

मेडिटेशन का कोई धर्म नहीं

इशान कहते हैं, “मेडिटेशन का कोई धर्म नहीं है और किसी भी विचारधारा को मानने वाले इसका अभ्यास कर सकते हैं। मेडिटेशन से प्रसन्नता, शांति और अनंत के विस्तार में होता हैं और मेडिटेशन में निश्चित रूप से बदलाव ला सकता है।”

हालांकि, ईशान शिवानंद कहते हैं कि मेडिटेशन को मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए और सांस एवं मुद्रा का खास तौर पर ख्याल रखा जाना चाहिए। क्रमशः व्यक्ति अपने बारे में जितना ज्यादा जानते जायेंगे। प्राकृतिक रूप से स्वयं को ज्यादा खोज पाएंगे।

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दीपक सेन
दीपक सेन
मुख्य संपादक

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