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Thursday, February 22, 2024
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राम मंदिर के भूमि पूजन में पीएम मोदी की उपस्थिति से ओवैसी को क्यों है ऐतराज

नई दिल्ली: अयोध्या में पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी की उपस्थिति का एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध किया है। ओवैसी ने पूछा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द को कार्यक्रम में आमंत्रित क्यों नहीं किया गया।

वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें भूमि पूजन समारोह में आमंत्रित किया गया है।

ओवैसी ने कहा, ‘‘भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहिए। वह निश्चित तौर पर व्यक्तिगत रूप में इस समारोह में शामिल हो सकते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को भी धार्मिक स्वतंत्रता है। प्रत्येक भारतीय नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता है।’’ ओवैसी ने कहा, ‘‘लेकिन मैं प्रधानमंत्री से जानना चाहता हूं कि क्या भारत सरकार का कोई धर्म है? नहीं, क्योंकि संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल अवसंरचना का एक हिस्सा है।’’

वहीं, विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र कुमार जैन ने अपने फेसबुक लाइव संबोधन में कहा कि हिन्दू समाज का 500 साल से चला आ रहा संघर्ष जल्द ही सार्थक होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘राम मंदिर निर्माण के लिए लाखों लोगों ने अपना बलिदान कर दिया। समूचा देश राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। पांच अगस्त को भूमि पूजन होगा। प्रधानमंत्री भूमि पूजन में शामिल होंगे।’’

जैन ने लोगों से अपील की कि वे पांच अगस्त को सुबह साढ़े दस बजे अयोध्या की तरफ मुंह करके खड़े हों और मन में मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ राम नाम का सुमिरन करें तथा आरती करें। उन्होंने कहा कि इस दिन प्रत्येक घर में दीपक जलाकर दीपावली जैसा उत्सव मनाया जाना चाहिए। जैन ने मुस्लिम समुदाय से भी हिन्दुओं की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।

इससे पहले, ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘‘आधिकारिक पद पर रहते हुए भूमि पूजन में शामिल होना प्रधानमंत्री की संवैधानिक शपथ का उल्लंघन होगा। धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल अवसंरचना का हिस्सा है।’’

हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ओवैसी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘हम नहीं भूल सकते कि अयोध्या में 400 साल से अधिक समय तक बाबरी मस्जिद खड़ी रही और इसे 1992 में आपराधिक भीड़ ने तोड़ दिया।’’