19 C
New Delhi
Thursday, February 25, 2021

लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते — सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने गुरूवार को फिर दोहराया कि लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते। साथ ही राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने की वजह पूछी।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष की याचिका पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की और कहा कि यह इतना आसान मसला नहीं है और ये विधायक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हम यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या इस प्रक्रिया (अयोग्यता) की अनुमति है या नहीं।’’

पीठ द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘ये विधायक हरियाणा चले गये, वहां एक होटल में ठहरे और टीवी चैनलों से कहा कि वे सदन में शक्तिपरीक्षण चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी शिकायत पूरी तरह संवैधानिक है और अध्यक्ष का फैसला होने तक कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।’’

सुनवाई के दौरान पीठ ने सिब्बल से जानना चाहा कि क्या बैठकों में शामिल नहीं होने के कारण विधायकों को अयोग्यता का नोटिस जारी किया जा सकता है? क्या इसे पार्टी के खिलाफ माना जा सकता है?

पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब सिब्बल ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों को बैठकों में शामिल होने के लिये पार्टी के व्हिप प्रमुख ने नोटिस जारी किया था।

इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही जोशी की ओर से पीठ के समक्ष दलील दी गयी कि बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही करने से 24 जुलाई तक उन्हें रोकने का उच्च न्यायालय को कोई अधिकार नहीं है।

सिब्बल ने इस संबंध में 1992 के बहुचर्चित किहोतो होलोहान प्रकरण में शीर्ष अदालत के फैसले का उल्लेख किया जिसमे कहा गया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष द्वारा की गयी अयोग्यता की कार्यवाही में अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि न्यायालय सिर्फ उसी स्थिति में हस्तक्षेप कर सकता है जब अध्यक्ष ने सदन के किसी सदस्य को अयोग्य या निलंबित करने का फैसला ले लिया हो।

सिब्बल ने यह जवाब उस समय दिया जब पीठ ने जानना चाहा कि अगर अध्यक्ष किसी सदस्य को निलंबित या अयोग्य घोषित करता है तो क्या न्यायालय इसमें हस्तक्षेप कर सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने राजस्थान उच्च न्यायालय के 21 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें कहा गया है कि 19 विधायकों की याचिका पर 24 जुलाई को फैसला सुनाया जायेगा और उसने अध्यक्ष से कहा कि तब तक के लिये अयोग्यता की कार्यवाही टाल दी जाये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लेटेस्ट अपडेट

error: Content is protected !!