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Friday, February 26, 2021

भ्रष्टाचार के दलदल में नोखा नगर पंचायत, सात निश्चय योजना के नाम पर मची है लूट

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना “सात निश्चय योजना” लूटपाट का ज़रिया बन गया है। विकास के लिए इस योजना के तहत आने वाले फंड से प्रदेश की सूरत बदले ना बदले ठेकेदारों और अधिकारियों की चांदी जरूर हो गई है। मामला जिले के नोखा नगर पंचायत का है। यहां फिलवक्त शहर की तस्वीर बदलने के लिए कई तरह के कार्य चलाए जा रहे हैं, लेकिन कार्यों में घोर अनियमितता की शिकायत मिल रही है।

रोहतासः मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना “सात निश्चय योजना” लूटपाट का ज़रिया बन गया है। विकास के लिए इस योजना के तहत आने वाले फंड से प्रदेश की सूरत बदले ना बदले ठेकेदारों और अधिकारियों की चांदी जरूर हो गई है। मामला जिले के नोखा नगर पंचायत का है। यहां फिलवक्त शहर की तस्वीर बदलने के लिए कई तरह के कार्य चलाए जा रहे हैं, लेकिन कार्यों में घोर अनियमितता की शिकायत मिल रही है।

8,54,700 की लागत से हुआ है निर्माण

ऐसी ही एक शिकायत शहर के वार्ड नंबर 9 से सामने आई है। यहां हाल ही में 8,54,700 की लागत से मिट्टीकरण, ईंट्टीकरण, PCC सड़क एवं नाली के साथ स्लैब का निर्माण कराया गया है। कार्य पूरी तरह सम्पन्न भी हो चुका है, लेकिन इससे पहले कि लोग इसका लाभ उठा पाते PCC सड़क और नाली के स्लैब ने गुणवत्ता की सच्चाई उगलनी शुरू कर दी है।

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धंसने लगी सड़क और टूटने लगे नाली के स्लैब

महज़ महिने-दो महिने पहले बनी PCC सड़क और नाली के स्लैब ने दम तोड़ना शुरू कर दिया है। टूटे हुए हिस्से को देखने से लगता है कि इसमें सीमेंट का इस्तेमाल सिर्फ नाम भर के लिए किया गया है। सरिया की मोटाई और ईंट की क्वालिटी भी मानकों के अनुरुप नहीं दिख रहे।

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शिकायत के बावजूद भी अधिकारी नहीं ले रहे सुध

स्थानीय लोगों की माने तो इसकी शिकायत भी संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन अब तक इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। वार्ड 9 के रहने वाले विश्वमोहन प्रसाद कहते हैं कि कार्य में घोर अनियमितता बरती गई है। जहां PCC सड़क, नाली और स्लैब के निर्माण में थर्ड क्लास मैटीरियल का इस्तेमाल किया गया है, वहीं मिट्टीकरण में स्थानीय लोगों के दरवाजे से उनकी निजी मिट्टी काट ली गई है।

शिकायतकर्ता को मिल रही मारने की धमकी

विश्वमोहन प्रसाद का स्पष्ट कहना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार में तमाम अधिकारी संलिप्त हैं। ठेकेदारों से मिलने वाले कमिशन के चक्कर ना तो अधिकारियों ने कार्यस्थल पर आकर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया ना ही स्थानीय लोगों से उनकी राय जानी। कार्य पूरा होते ही गुणवत्ता को परखे बिना ही अधिकारी उसे स्वीकृत कर दिए। अब आलम यह है कि नव-निर्मित PCC सड़क, नाली और उसका स्लैब महीने भर में ढहने लगे। बकौल विश्वमोहन जब इसकी शिकायत उन्होंने उच्च अधिकारी से करनी चाही तो उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने लगी। हालांकि इसकी परवाह किए बिना उन्होने अधिकारीयों तक अपनी बात पहुंचाने की हर संभव कोशिश की है।

आरोपों को बेबुनियाद बता रहे अधिकारी

इधर इस पूरे मामले पर जब संबंधित अधिकारी से दूरभाष पर बात की गई, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहीर करते हुए इस आरोप को कोरा झूठ करार दिया। उनका कहना है कि सभी काम कार्यपालक अभियंता और कनीय अभियंता के देख-रेख में संपन्न हुए हैं इस लिए गुणवत्ता में कमी का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। उनका आरोप है कि पुर्वाग्रह से ग्रसित कुछ लोग ऐसी बातों को तुल देकर नगर पंचायत की छवी खराब करना चाहते हैं।

बहरहाल, आरोप सच्चे हैं या झूठे, कौन सच और कौन झूठ बोल रहा है ये सब जांच के विषय है। लेकिन अगर विकास आम आदमी की सुविधाओं के लिए हो रहा तो उसकी तसल्ली जरूरी है, जिसका खयाल रखना सरकार और उसके मातहतों की जिम्मेदारी बनती है।

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अभय पाण्डेय
आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

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