32.1 C
New Delhi
Saturday, July 24, 2021

JDU के मास्टर प्लान से चित हुए चिराग, परिवार की पार्टी में बने दया के पात्र

पटनाः 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने यह सोचा भी नहीं होगा कि जिस JDU को वो खुले मंच से ललकार रहे हैं एक दिन उसी के मास्टर प्लान में उलझ कर खाली हाथ हो जाएंगे। चुनावी नतीजे आने के लगभग 8 महीने बाद आज चिराग पासवान का कद उनकी पार्टी LJP में ही कम गया है। चिराग को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह उनके चाचा पशुपति पारस को लोकसभा में पार्टी के नेता पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। परिवार की पार्टी में चिराग दया के पात्र बन गए हैं।

पशुपति कुमार पारस चुने गए संसद के निचले सदन में LJP के नेता

लोकसभा चुनाव 2019 में चुने गए LJP के छह सांसदों में से अकेले चिराग को छोड़ पशुपति पारस समेत सभी पांच एक तरफ हैं। पांचों ने दल के मुखिया चिराग पासवान को संसद के निचले सदन में पार्टी के नेता के पद से हटाने के लिए हाथ मिला लिया है। उनकी जगह उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को इस पद के लिए चुन लिया है। सोमवार शाम को लोकसभा सचिवालय ने भी पारस को सदन में LJP के नेता के रूप में मान्यता दे दी है।

Advertisement

चिराग ने किया था दावा, अब कभी सीएम नहीं बनेंगे नीतीश कुमार

बता दें 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA में रहते चिराग पासवान ने खुले-आम JDU के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। लगभग हर उस सीट से चिराग ने LJP के उम्मीदवार खड़े किए थे, जहां से JDU के उम्मीदवार मैदान में थे। इस बात को लेकर NDA के शीर्ष नेतृत्व ने कई दफे चिराग को समझाने की कोशिश भी की थी, लेकिन वो नहीं माने। उन्होंने ये कहकर मैदान में अपने उम्मीदवार उतार दिए कि बिहार में NDA की सरकार बनेगी, लेकिन BJP और LJP के दम पर उसमें JDU कहीं नहीं होगी। नीतीश कुमार अब कभी सीएम नहीं बनेंगे।

Advertisement

2025 से पहले भी हो सकते हैं बिहार में विधानसभा चुनाव- चिराग पासवान

चुनाव परिणाम घोषित होने और नीतीश के मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद LJP के बीसवें स्थापना दिवस पर चिराग पासवान ने कार्यकर्ताओं को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में उन्हों ने कहा था कि बिहार विधानसभा के अगले चुनाव वर्ष 2025 से पहले भी हो सकते हैं, इसलिए हमें सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारियों में अभी से लग जाना चाहिए।

2020 बिहार विधानसभा चुनाव में JDU के खिलाफ चिराग ने दी थी BJP नेताओं को टिकट

कहा जाता है कि पर्दे के पीछे BJP भी उस पूरे खेल में चिराग के साथ थी। चिराग ने कई सीट से उन उम्मीदवारों को टिकट दिया था जो मूल रुप से BJP के झंडावरदार थे और आज भी उसी के साथ हैं। देखा जाए तो BJP को चिराग के कृत्य का फायदा भी मिला।

चिराग की वजह से बिहार में JDU को हुआ नुकसान, BJP बनी बड़ी पार्टी

BJP ने अपने हिस्से की 121 में से 74 सिटों पर जित हासिल की, जबकि JDU 115 में से मात्र 43 सिट ही जीत पाई। इससे पहले हर चुनाव में BJP की जिति हुई सीटें JDU से कम रही थी, लेकिन LJP की वजह से इस बार JDU को 35 सिटों का नुकसान हो गया और वह बिहार में BJP से छोटी पार्टी बन गई। आज नीतीश कुमार अगर बिहार के मुख्यमंत्री हैं, तो यह NDA के शीर्ष नेतृत्व की दरियादिली है।

साल 2000 में चिराग के पिता रामविलास पासवान ने रखी थी LJP की नींव

बहरहाल, परिवार की पार्टी में आज चिराग पासवान अकेले पड़ गए हैं और सब कुछ उनके हाथों से फिसलता नज़र आ रहा है। जनता दल से अलग होकर साल 2000 में चिराग के पिता रामविलास पासवान ने जिस पार्टी के नींव रखी थी। अपने खून पसीने से सींच कर जिस LJP को फर्श से अर्श तक पहुंचाया था, आज उसी पार्टी में चिराग दया के पात्र बन गए हैं। चाचा पशुपति पारस मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रशंसक बन गए हैं। चिराग की आंखों में खटने वाले नीतीश कुमार उनकी नज़र में एक अच्छा नेता तथा ”विकास पुरुष” हैं।

Read also: अपने ही बुझा रहे बंगले का चिराग, चाचा समेत LJP के पांच सांसदों ने पकड़ी अलग राह

अभय पाण्डेय
आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लेटेस्ट अपडेट

error: Content is protected !!