पटनाः बिहार सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अब “आईजी बॉर्डर” (इंस्पेक्टर जनरल, बॉर्डर) का नया पद सृजित किया है। IG Border विशेष रूप से सीमा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का काम करेगा।
कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला
यह निर्णय मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। नया आईजी बॉर्डर बिहार पुलिस की स्पेशल ब्रांच के अंतर्गत कार्य करेगा और भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में खुफिया तंत्र, समन्वय और निगरानी को और प्रभावी बनाएगा।
729 किलोमीटर लंबी खुली सीमा बनी चुनौती
बिहार की नेपाल से लगभग 729 किलोमीटर लंबी खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। लंबे समय से इस सीमा का इस्तेमाल घुसपैठ, नकली नोटों की तस्करी, मानव तस्करी और मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही के लिए किए जाने की आशंका जताई जाती रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के दिनों में सीमा पार गतिविधियों को लेकर चिंता भी व्यक्त की थी।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर होगा समन्वय
सरकार का मानना है कि नए आईजी बॉर्डर पद के गठन से सीमावर्ती जिलों में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। साथ ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी और खुफिया सूचना संग्रह की प्रक्रिया भी तेज होगी।
मुख्य सचिव ने की थी उच्चस्तरीय समीक्षा
इससे पहले मुख्य सचिव Pratyaya Amrit ने सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। बैठक में “नो मैन्स लैंड” से अतिक्रमण हटाने, सीमा चौकसी बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
अमित शाह भी कर चुके हैं सीमा सुरक्षा की समीक्षा
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी सीमावर्ती क्षेत्र किशनगंज में सुरक्षा एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में SSB, BSF और ITBP के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार के इस फैसले को बिहार की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
Read also: “जाति पूछकर गोली मारो”: सीएम सम्राट की टिप्पणी पर बिहार में सियासी बवाल
