पटनाः “जेल नहीं जाता तो राजनीति में नहीं आता” – यह बयान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस संबोधन का हिस्सा है, जो उन्होंने शुक्रवार को विधानसभा में दिया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए अपने राजनीतिक सफर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सत्ता किसी की “बपौती” नहीं है और वे आज जिस पद पर हैं, वह बिहार की 14 करोड़ जनता के आशीर्वाद और सहयोगी नेताओं के भरोसे का परिणाम है। साथ ही, उन्होंने अपने अतीत के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे कठिन परिस्थितियों ने उनके राजनीतिक जीवन को दिशा दी।
तेजस्वी के तंज से भड़के सियासी घमासान
दरअसल, यह सियासी बयानबाज़ी उस वक्त तेज हुई जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उन्हें “सेलेक्टेड CM” बताते हुए कहा कि वे “रील बनाकर टाइम पास करेंगे”। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा-“पगड़ी संभालकर रखिए, उस पर भी नजर है।” इन बयानों के बाद सदन का माहौल गरमा गया और सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में इसका जवाब दिया।
लालू शासन पर चौधरी का आरोपों का प्रहार
भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके शासनकाल में उनके परिवार के 22 सदस्यों को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि अगर वे उस दौर से नहीं गुजरे होते, तो शायद राजनीति में नहीं आते।
90 के दशक से शुरू हुआ सियासी सफर
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी शुरुआत 1994 में समता पार्टी के गठन के साथ हुई थी। उन्होंने कहा कि उनके पिता इस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे, जिससे उन्हें शुरू से ही राजनीतिक माहौल मिला।
गठबंधन की ताकत का किया जिक्र
अपने संबोधन में उन्होंने नरेन्द्र मोदी, नीतीश कुमार, चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा जैसे नेताओं का भी जिक्र किया और कहा कि उनके सहयोग से ही वे आज इस पद पर पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि सत्ता किसी एक की नहीं, बल्कि सामूहिक समर्थन का परिणाम है।
नीतीश को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा
भाषण के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री बनाने में भी नीतीश कुमार की भूमिका रही थी। यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है।
बढ़ती बयानबाज़ी, तेज होती सियासत
विधानसभा में दिया गया यह बयान सत्ता और विपक्ष के बीच जारी टकराव को और तेज करता दिख रहा है। सम्राट चौधरी के इस भाषण को विपक्ष के आरोपों पर सीधे पलटवार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी और तेज होने के संकेत हैं।
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