पुष्करः एक सशक्त और प्रेरणादायी शुरुआत करते हुए ARUVA Foundation तथा BRICS Student Council के सहयोग से पुष्कर, राजस्थान में होलिका दहन एवं रंगरेव 2026 का सफल आयोजन किया गया। यह अपनी तरह की पहली पहल रही, जिसमें सांस्कृतिक उत्सव को युवा सशक्तिकरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के सशक्त संदेश के साथ जोड़ा गया।
पवित्र आरंभ, सकारात्मक संदेश
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक होलिका दहन पूजा से हुआ, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। आध्यात्मिक वातावरण और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न इस अनुष्ठान ने आयोजन को गरिमामयी शुरुआत प्रदान की।
परंपरा की इस पृष्ठभूमि पर आगे बढ़ते हुए कार्यक्रम रंगरेव के रूप में विकसित हुआ – एक जीवंत सांस्कृतिक संगम, जिसने युवाओं में एकता, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया।
युवा नेतृत्व और सांस्कृतिक संवाद का मंच
होलिका दहन एवं रंगरेव 2026 सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक गतिशील मंच सिद्ध हुआ, जहाँ युवा नेता, शांति कार्यकर्ता एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व एक साथ आए और सामूहिक रूप से “भारत” की समावेशी भावना का प्रतिनिधित्व किया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रेरित करना, सामुदायिक संबंधों को सुदृढ़ करना और समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में संवाद सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और प्रेरक संबोधन ने युवाओं को समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
नैन्सी आनंद एवं अनिल अष्टानी जैसे विशिष्ट व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आयाम प्रदान किया। उनके विचारों और सहभागिता ने युवा-नेतृत्व आधारित परिवर्तन और सामूहिक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
इस आयोजन की सफलता में प्रायोजकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विशेष धन्यवाद गोपाल्स 56 एवं डिजिटल मित्तर को, जिन्होंने न केवल उदार सहयोग प्रदान किया, बल्कि युवा सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान भी स्थापित की। उनके सहयोग से यह पहल और अधिक प्रभावशाली, संगठित और उद्देश्यपूर्ण बन सकी।
परंपरा और आधुनिक दृष्टि का सुंदर समन्वय
यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि सांस्कृतिक उत्सव केवल परंपरा तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे सशक्तिकरण, एकता और दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन के प्रभावी मंच भी बन सकते हैं।
होलिका दहन एवं रंगरेव 2026 ने पुष्कर की सांस्कृतिक धरती पर यह संदेश स्पष्ट किया कि जब उत्सव उद्देश्य से जुड़ता है, तब वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक सशक्त कदम बन जाता है।





