पावर सेक्टर के निजीकरण की जोरदार तैयारी, क्या होगा लोगों पर असर

अजय वर्मा
Advertisements

नई दिल्ली: यदि सब कुछ इसी गति से चलता रहा तो न केवल बिजली क्षेत्र का देश में निजीकरण हो जायेगा। इससे बिजली का बिल इतना बढ़ जायेगा कि लोगों की कमर टूट जायेगी। केंद्र सरकार इस बारे में तेजी से तैयारी कर रही है। कई राज्यों में सांकेतिक निजीकरण हो भी चुका है।

केंद्र सरकार ने विद्युत अधिनियम संशोधन बिल 2020 का मसौदा तैयार कर राज्य सरकारों को भेजा था। इस पर सुझाव आ भी चुके होंगे क्योंकि 5 जून तक का समय दिया हुआ था। शायद संसद के अगले सत्र में इस बारे में कानून भी आ जायेगा। हालांकि इसके खिलाफ जगह—जगह बिजलीकर्मी आंदोलन भी कर रहे हैं।

ग्राहकों पर गिरेगी गाज

सूत्रों के मुताबिक इसके अनुसार हर उपभोक्ता को बिजली लागत का पूरा मूल्य देना होगा। सब्सिडी अधितम तीन साल तक मिल सकती है। अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती है। इसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है। नई नीति और निजीकरण के बाद सब्सिडी समाप्त होने से स्वाभाविक तौर पर इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी।

कैसे बढ़ जायेगा रेट

सूत्र बताते हैं कि बिजली की लागत का राष्ट्रीय औसत 6.78 रुपये प्रति यूनिट है और नये कानून के बाद कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा लेने के बाद 8 रुपये प्रति यूनिट से कम दर पर बिजली किसी को नहीं मिलेगी। इस प्रकार एक किसान को लगभग 6000 रुपये प्रति माह और घरेलू उपभोक्ताओं को 6000 से 8000 रुपये प्रति माह तक बिजली बिल देना होगा। इसके अलावा पावर सप्लाई के लाइसेंस अलग-अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई पावर सप्लाई कम्पनियां बनाने का प्रावधान है।

घरेलू गैस सिलेंडर की तरह ही विकल्प मिलेगा कि आप निजी क्षेत्र में किस कंपनी से बिजली लेना पसंद करेंगे। मसलन रिलायंस, एस्सार, अडानी अथवा किसी सरकारी कम्पनी से। सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने की अनिवार्यता होगी, जबकि प्राइवेट कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा। स्वाभाविक है कि निजी कम्पनियां मुनाफे वाले बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी, जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप, गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं और लागत से कम मूल्य पर बिजली टैरिफ के घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी और घाटा उठाएगी।

इस कानून के पास होने के कुछ ही समय बाद सरकारी कम्पनियां बाहर हो जाएगी और निजी कंपनियों का पॉवर सेक्टर पर कब्जा हो जाएगा। निजी कंपनियों को कोई घाटा न हो इसीलिये सब्सिडी समाप्त कर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की तैयारी भी चल रही है।

Advertisements

Share This Article
समाचार संपादक
Leave a Comment