Thursday, February 19, 2026

पंडित जसराज की कुछ अनकही बातें : जब पत्नी मधुरा ने कहा था शादी तो पंडित जी से ही होगी, वरना नहीं

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नई दिल्लीः सोमवार को लोकप्रिय शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का निधन 90 साल की उम्र में अमेरिका के न्यूजर्सी में हो गया। हालांकि, उनका हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से बहुत गहरा नाता रहा है। वे अपने जमाने के दिग्गज फिल्ममेकर वी. शांताराम के दामाद थे।

कैसे शांताराम के दामाद बने पंडित जसराज

सुनीता बुद्धिराज की किताब ‘रसराज: पंडित जसराज’ के मुताबिक वी. शांताराम की बेटी मधुरा का जन्म 1937 में हुआ था। उनके पिता वी. शांताराम स्वयं बड़े कलाकार थे और उनकी कला उनकी फिल्मों में स्पष्ट झलकती थी। वी. शांताराम की बेटी मधुरा ने साल 1952 से ही गाना सीखना शुरू कर दिया था। गुरु विपिन सिंह से मणिपुरी और भरतनाट्यम सीखने के बाद ‘झनक-झनक पायल बाजे’ बनने के समय गोपीकिशन जी से कथक की भी शिक्षा मधुरा जी ने ली। 1960 में मधुरा और पंडित जसराज के बीच पत्र-व्यवहार शुरू। वैसे ये पत्र छोटे और औपचारिक होते थे कि मैं अमुक तारीख को आने वाला हूं या फिर आपका रियाज कैसा चल रहा है।

इस तरह दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे। शांताराम जी को भी पंडित जसराज अच्छे लगे। धीरे-धीरे वे समझ गए थे कि मधुरा का रुझान उनकी ओर है। उस समय शांताराम की फिल्म ‘स्त्री’ पूरी होने वाली थी। उन्होंने सोचा कि पहले ‘स्त्री’ रिलीज हो जाए, उसके बाद इस मामले को देखेंगे। मधुरा अपनी छोटी बहिन चारुशीला के साथ ‘स्त्री’ के रिलीज के लिए कोलकाता गई थीं।

एक बार जब शांताराम ने जसराज से उनकी कमाई के विषय में पूछा तो पता चला कि 200-300 रुपए महीना कमा लेते हैं। उन दिनों 200-300 रुपए भी बहुत होते थे, फिर हजारों तो बहुत बड़ी रकम थी। किताब के मुताबिक मधुरा बताती हैं, मैंने पापा से कह दिया कि मैं शादी करूंगी तो इन्हीं से वरना नहीं करूंगी।’ वी. शांताराम बहुत बड़े निर्माता-निर्देशक थे। वर्ष 1962 में उन्होंने मधुरा के साथ पंडित जसराज की सगाई कर दी और उसके बाद बेटी की शादी जिस धूमधाम से होनी चाहिए थी, उसी धूमधाम से हुई।

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‘अंतरिक्ष में भी था रसराज का राज’ : पंडित जसराज के नाम पर सौरमंडल में रखा गया था क्षुद्र ग्रह का नाम

आज हमारे बीच पंडित जसराज भले ही मौजूद ना हों पर उनकी आवाज और उनका अस्तित्व हमेशा रहेगा। 13 साल पहले नासा ने एक क्षुद्र गृह का नाम ही पंडित जसराज के नाम पर रखा था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय कलाकार थे। खास बात ये थी कि इस क्षुद्र ग्रह का नंबर पंडित जसराज की जन्मतिथि से उलट रखा गया है।

नासा और इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन के वैज्ञानिकों ने बृहस्पति और मंगल के बीच 300128 नंबर का क्षुद्र ग्रह खोजा था और इसका नाम पंडित जसराज के नाम पर रखा। पंडित जसराज की जन्मतिथि 28/01/1930 है। इस क्षुद्र ग्रह के नंबर के उलट। नासा ने कहा था- पंडित जसराज छुद्र ग्रह हमारे सौरमण्डल में गुरु और मंगल के बीच रहते हुए सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।

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8 दशक संगीत साधना को देने वाले पंडित जसराज ने क्षुद्र ग्रह के नामकरण पर कहा था- मुझे तो ईश्वर की असीम कृपा दिखती है। भारत और भारतीय संगीत के लिए ईश्वर का आशीर्वाद है।

माइनर प्लैनेट है पंडित जसराज

माइनर प्लानेट वह ग्रह होते हैं जो न तो ग्रह हैं न ही इन्हें पूरी तरह से धूमकेतु कहा जा सकता है। बेटी दुर्गा ने बताया था कि पंडित जसराज क्षुद्र ग्रह के बारे में आईएयू ने 23 सितंबर 2019 को इस बात की घोषणा की थी और एक पत्र मुंबई स्थित घर पर पहुंचाया था।

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