लखनऊः अजमेर की पर्वतारोही नैन्सी आनंद ने हिमाचल प्रदेश के 6,110 मीटर ऊंचे माउंट यूनम शिखर पर सफल आरोहण कर अपनी साहसिक उपलब्धियों की सूची में एक और बड़ी कामयाबी जोड़ दी है। कठिन मौसम, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण चढ़ाई के बीच नैन्सी ने शिखर तक पहुंचकर अपनी शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता का भी परिचय दिया।
अजमेर के TPADL में बतौर HR Head कार्यरत लखनऊ निवासी नैन्सी आनंद ने महज दो दिन में इस दुर्गम शिखर तक पहुंचकर आरोहण पूरा किया। समुद्र तल से 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले पर्वतों पर इतनी कम अवधि में सफल चढ़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। इसके लिए उच्च स्तर की शारीरिक फिटनेस, सहनशक्ति, मानसिक मजबूती और कठिन परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता जरूरी होती है।
अफ्रीका और यूरोप की सबसे ऊंची चोटियां भी कर चुकी हैं फतह
नैन्सी का यह पहला बड़ा पर्वतारोहण अभियान नहीं है। उन्होंने वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश स्थित माउंटेनियरिंग बेसिक कोर्स पूरा किया था। इसके बाद उन्होंने अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो और यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस पर भी सफलता हासिल की। अगस्त 2025 में एल्ब्रुस फतह करने के साथ उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान को एक नई ऊंचाई दी।
नैन्सी P1 और P2 प्रमाणित पैराग्लाइडिंग पायलट भी हैं। यानी पहाड़ों पर चढ़ने के साथ आसमान में उड़ान भरने का उनका जुनून भी उतना ही मजबूत है।
युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा
TPADL के CEO संदीप धर्मीजा ने नैन्सी आनंद की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनके मुताबिक, नैन्सी का साहसिक अभियान यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास के सामने कोई लक्ष्य असंभव नहीं है।
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माउंट यूनम की 6,110 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचना केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस जज्बे की कहानी है जो मुश्किल रास्तों से घबराने के बजाय उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने का जरिया बना लेता है। अजमेर की नैन्सी आनंद ने एक बार फिर साबित किया है कि ऊंचाई पहाड़ की नहीं, हौसले की होती है।
