विकास और बेरोजगारी मुख्य मुद्दा रहा विधानसभा चुनाव का

अजय वर्मा
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पटना: विधानसभा चुनाव के सभी तीन चरण तो संपन्न हो गये लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि न राम मंदिर, न एनसीआर बल्कि विकास और बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बन कर उभरा। विकास को 42 तो बेरोजगारी को 30 फीसदी वोटरों ने मुद्दा माना। जहां तक तीसरे चरण के मतदान की बात है तो इसमें करीब 55 प्रतिशत वोटिंग हुई।

पहले विकास, फिर बेरोजगारी

इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा विकास का रहा। करीब 42 फीसदी लोगों के अनुसार विकास का मुद्दा नंबर एक पर रहा और बेरोजगारी का मुद्दा 30 फीसदी के साथ नंबर दो पर रहा। 11 फीसदी लोगों का मानना है कि महंगाई, 3 फीसदी लोगों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तीन प्रतिशत लोगों ने राजनीतिक दलों को ध्यान में रखकर मतदान किया।

मुद्दों का क्रम

जहां तक क्रम लगाने की बात है तो विकास को 42 फीसदी, बेरोजगारी को 30 फीसदी, महंगाई को 11 फीसदी, PM मोदी के कारण 3 फीसदी, राजनीतिक दलों पर 3 फीसदी, स्थानीय उम्मीदवार पर 2 फीसदी, कानून व्यवस्था पर 1 फीसदी, आर्थिक स्थिति पर 1 फीसदी, भ्रष्टाचार पर 1 फीसदी, राष्ट्रीय सुरक्षा पर 1 फीसदी, जाति पर 1 फीसदी, नीतीश कुमार के कारण 1 फीसदी, अन्य मुद्दे 3 फीसदी वोटरों के मन में रहे।

किसके कौन मुद्दे

राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस बार मुख्य तौर पर रोजगार के मसले पर नीतीश सरकार को घेरा। उनका आरोप रहा कि भाजपा-जदयू की सरकार नौकरी देने में असफल रही है। राजद ने वादा किया कि वो सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में दस लाख नौकरी निकालने का आदेश देंगे। भाजपा ने भी अपने मेनिफेस्टो में 19 लाख रोजगार पैदा करने की बात कही।

भाजपा ने किया मुफ्त वैक्सीन का वादा

भाजपा ने वोटरों को लालू राज की याद दिलाई तो भ्रष्टाचार के मसले को उछाला। उसने कोरोना वैक्सीन मुफ्त देने की बात कही, जिसपर चुनाव के दौरान जमकर चर्चा हुई।

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समाचार संपादक
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