भोजपुर: राजनीति में अक्सर नेताओं की संवेदनाएं औपचारिकता तक सीमित नजर आती हैं, लेकिन शुक्रवार को बिलौटी गांव में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान जब दिवंगत भरत तिवारी के घर पहुंचे, तो वहां का माहौल गमगीन था। परिवार के लोगों की आंखों में आंसू थे और पूरे गांव में शोक की लहर पसरी हुई थी।
श्रद्धांजलि में दिखी भीतर की पीड़ा
इसी बीच जब चिराग पासवान भरत तिवारी की तस्वीर के सामने पहुंचे, तो उन्होंने जिस अंदाज में श्रद्धांजलि दी, उसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। चिराग तस्वीर के सामने घुटनों के बल बैठ गए, सिर झुकाया और कुछ पल तक मौन रहकर भरत को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहां मौजूद लोगों के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला था।
श्रद्धांजलि का यह अंदाज क्यों खास है
घुटनों के बल बैठकर श्रद्धांजलि देना सम्मान और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। सार्वजनिक जीवन में इस तरह का भाव कम देखने को मिलता है। चिराग का यह अंदाज भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उन्होंने इस दुख को सिर्फ सुना नहीं, बल्कि भीतर से महसूस भी किया।
सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, एक परिवार का दर्द
चिराग के इस कदम ने यह संदेश दिया कि भरत तिवारी की मौत उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक परिवार का गहरा दर्द है। श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने भरत के माता-पिता और अन्य परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और उनका दर्द सुना।
न्याय दिलाने का किया वादा
परिजनों से मुलाकात के दौरान चिराग पासवान ने साफ कहा कि भरत को अब सदेह वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उनके परिवार को न्याय दिलवाना ही अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जब तक भरत के परिजनों को इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। चिराग ने यह भी कहा कि न्याय की इस लड़ाई में चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलों का सामना करना पड़े या कुछ भी करना पड़े, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
हर स्तर पर उठेगी आवाज
चिराग ने परिवार को भरोसा दिलाया कि भरत को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
देश भर में चर्चा का विषय बना यह अंदाज
देश भर में चिराग का यह अंदाज अब चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि घुटनों के बल बैठकर दी गई यह श्रद्धांजलि सिर्फ सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि एक गहरे मानवीय जुड़ाव और संवेदना को भी दर्शाती है। माना जा रहा है कि यह दृश्य भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।
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