Friday, July 3, 2026

बिहार की नई टोल नीति पर बड़ा सवाल: क्या जनता को पूरी तरह निचोड़ लेना चाहती है सरकार?

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अभय वाणीः बिहार सरकार ने राज्य हाईवे और बायपास पर टोल टैक्स लगाने का फैसला किया है (Bihar New Toll Policy)। कहा जा रहा है कि निजी वाहनों से करीब ₹1.25 प्रति किलोमीटर वसूले जाएंगे। सरकार इसे विकास और सड़क रखरखाव के लिए ज़रूरी बता रही है। लेकिन आम आदमी के मन में सवाल उठ रहा है—क्या सरकार अब जनता को पूरी तरह निचोड़ लेना चाहती है?

गाड़ी खरीदते ही टैक्स का पहला वार

पहले गाड़ी खरीदिए, फिर टैक्स दीजिए। बिहार में वाहन खरीदते ही 8 से 12 प्रतिशत तक रोड टैक्स देना पड़ता है। दस लाख की गाड़ी पर यह रकम करीब एक लाख रुपये तक पहुँच जाती है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, HSRP, स्मार्ट कार्ड शुल्क और अन्य औपचारिकताएँ अलग।

सड़क पर उतरते ही हर किलोमीटर पर कमाई

फिर सड़क पर उतरिए, तो हर लीटर पेट्रोल-डीज़ल पर भारी टैक्स चुकाइए। पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में केंद्र सरकार का एक्साइज और बिहार सरकार का VAT दोनों शामिल हैं। यानी सड़क पर चलने का हर किलोमीटर पहले से ही सरकार के लिए कमाई का जरिया बना हुआ है।

बीमा, फिटनेस और दूसरे शुल्कों का दबाव

इतना ही नहीं, बीमा भरिए, फिटनेस कराइए, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनवाइए—हर मोड़ पर भुगतान कीजिए। यानी वाहन रखना अब सुविधा कम और आर्थिक बोझ ज्यादा बनता जा रहा है।

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अब उसी सड़क पर चलने के लिए फिर टोल

अब सरकार कह रही है कि राज्य हाईवे और बायपास पर चलना है तो अलग से टोल भी दीजिए। यानी जनता गाड़ी खरीदे तो टैक्स, पेट्रोल भरे तो टैक्स, सड़क पर चले तो टैक्स—और अब उसी सड़क पर गुजरने के लिए फिर टैक्स। आख़िर यह सिलसिला कहाँ रुकेगा?

रोज़मर्रा की यात्रा पर सीधा असर

सोचिए, कोई नौकरीपेशा व्यक्ति या छोटा व्यापारी अगर रोज़ 50 किलोमीटर सफर करता है, तो सिर्फ टोल में हर दिन ₹60 से ज्यादा और महीने में करीब ₹2000 अतिरिक्त खर्च करेगा। बिहार जैसे राज्य में, जहाँ लाखों परिवार सीमित आय में घर चलाते हैं, यह फैसला सीधे उनकी जेब पर हमला है।

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क्या बिहार की सड़कें इस वसूली के लायक हैं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार की सड़कें ऐसी हैं कि उन पर यह बोझ जायज़ लगे? जगह-जगह गड्ढे, अधूरी मरम्मत, जाम और खराब रखरखाव—इन सबके बीच टोल वसूली का फैसला जनता के ज़ख्म पर नमक छिड़कने जैसा लगता है।

टोल की अवधारणा तब स्वीकार्य होती है जब जनता को उसके बदले बेहतर सड़क, तेज़ सफर और सुरक्षित यात्रा मिले। लेकिन अगर सड़क की हालत वही पुरानी रहे और वसूली नई शुरू हो जाए, तो असंतोष स्वाभाविक है।

एक गाड़ी पर बिहार का नागरिक कितना और कहाँ-कहाँ भुगतान करता है?

मद दर / राशि

श्रेणी

रोड टैक्स (बिहार) गाड़ी की कीमत का 8%–12% राज्य सरकार
रजिस्ट्रेशन फीस (RC) ₹600 – ₹2,000 केंद्र निर्धारित, राज्य में लागू
HSRP / स्मार्ट कार्ड ₹400 – ₹1,500 प्रशासनिक शुल्क
बीमा ₹2,500 – ₹50,000+ वैधानिक/निजी खर्च
पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज लगभग ₹20–₹22 प्रति लीटर केंद्र सरकार
पेट्रोल पर बिहार VAT लगभग 24%–32% राज्य सरकार
डीज़ल पर केंद्रीय एक्साइज लगभग ₹15–₹18 प्रति लीटर केंद्र सरकार
डीज़ल पर बिहार VAT लगभग 19%–22% राज्य सरकार
PUC ₹60 – ₹150 वैधानिक शुल्क
फिटनेस फीस ₹600 – ₹5,000 केंद्र निर्धारित (तय अंतराल पर)
प्रस्तावित नया टोल (बिहार) ₹1.25 प्रति किमी राज्य सरकार

आख़िरी सवाल सरकार से

यह सिर्फ टोल का सवाल नहीं है। यह उस सोच का सवाल है जिसमें जनता को सुविधा देने से पहले उसकी जेब टटोली जाती है।

बिहार की जनता विकास के खिलाफ नहीं है। लेकिन वह यह ज़रूर पूछ रही है—जब गाड़ी खरीदने से लेकर सड़क पर चलाने तक हर कदम पर सरकार पैसा ले रही है, तो फिर हर नई सड़क पर अलग से टोल क्यों?

अगर यही नीति रही, तो आने वाले दिनों में यह टोल टैक्स सड़क विकास से ज्यादा जनता के गुस्से का कारण बनेगा।

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अभय पाण्डेय
अभय पाण्डेयhttp://www.newsstump.com
अभय पाण्डेय एक युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं में बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUST) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की थी। अपनी बेहतरीन रिपोर्टिंग और जमीनी पकड़ के दम पर उनकी कई खबरें राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर चुकी हैं।

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