मोतिहारी: बिहार की राजनीति में पूर्व सांसद Anand Mohan के एक बयान ने नई सियासी चर्चा छेड़ दी है। मोतिहारी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा— “हम किसी पार्टी के बंधुआ मजदूर नहीं हैं। जो हमारी बात करेगा, हम उसी के साथ जाएंगे। हम पट्टा नहीं पहनने वाले किसी का, किसी के जर-गुलाम नहीं हैं।”
अपने संबोधन में आनंद मोहन ने यह भी कहा— “राजपूत से राजनीति निकली है”, जिसे राजनीतिक हलकों में सामाजिक और राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनके इस बयान ने साफ संकेत दिया है कि वे किसी एक राजनीतिक धड़े के साथ स्थायी रूप से बंधे रहने के पक्ष में नहीं हैं।
बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले आनंद मोहन का यह बयान सत्ता पक्ष और विपक्ष— दोनों के लिए एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह बयान मौजूदा सियासी समीकरणों में अपनी भूमिका और प्रभाव को रेखांकित करने की कोशिश है।
खासतौर पर ऐसे समय में, जब राज्य में राजनीतिक दल सामाजिक आधार को मजबूत करने और भविष्य की रणनीति तय करने में जुटे हैं, आनंद मोहन का यह रुख आने वाले दिनों में नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा को और तेज कर सकता है।
अब देखना होगा कि यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक संकेत भर है या फिर बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका
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