पटनाः बिहार की राजनीति में हालिया बदलावों के बाद सत्ता का समीकरण तेजी से बदला है। नीतीश कुमार के इस्तीफे (Nitith Kumar Resignation) और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही अब नई एनडीए सरकार (NDA Government) के मंत्रिमंडल विस्तार (Bihar Cabinet Expansion 2026) को लेकर हलचल तेज हो गई है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि 4 मई 2026 के बाद कभी भी कैबिनेट विस्तार हो सकता है।
पुराने अनुभव के साथ नए चेहरों की एंट्री
सूत्रों के मुताबिक, Bihar Cabinet Expansion 2026 में अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन साधने की कोशिश होगी। करीब 70 फीसदी मंत्री पुराने हो सकते हैं, जो पहले नीतीश कुमार की सरकार में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं, जबकि 30 फीसदी नए चेहरों को मौका देकर राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है। यह रणनीति न केवल शासन के अनुभव को बनाए रखने के लिए है, बल्कि नए सामाजिक समीकरणों को भी साधने का प्रयास मानी जा रही है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण पर फोकस
दरअसल, बिहार की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में इस विस्तार में भी अलग-अलग जातीय समूहों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष जोर रहेगा। पिछड़े, अति पिछड़े, दलित और सवर्ण वर्गों के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता मानी जा रही है।
एनडीए में हिस्सेदारी का गणित
एनडीए के भीतर भी सीटों और मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। जनता दल (यूनाइटेड) से जहां अधिकतर पुराने चेहरों को बनाए रखने की संभावना है, वहीं भारतीय जनता पार्टी अपने कोटे से सहयोगी दलों को भी साधने की रणनीति पर काम कर रही है। इसमें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), रालोमो और हम जैसे दलों को प्रतिनिधित्व मिलने की चर्चा है।
राजू तिवारी का नाम चर्चा में
इसी कड़ी में गोविंदगंज से विधायक राजू तिवारी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। वे चिराग पासवान के करीबी माने जाते हैं और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उनका दावा मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर लोजपा (रामविलास) को मंत्रिमंडल में जगह मिलती है, तो राजू तिवारी को प्राथमिकता दी जा सकती है।
“दो विभाग” फॉर्मूले पर मंथन
वहीं, सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए “दो विभाग” फॉर्मूले पर भी विचार कर रही है। इसके तहत एक मंत्री को अधिकतम दो विभाग देने की योजना है, ताकि कार्यभार संतुलित रहे और फैसलों में तेजी लाई जा सके।
वर्तमान स्थिति और आगे की दिशा
फिलहाल स्थिति यह है कि कई अहम विभाग मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उनके उपमुख्यमंत्रियों के पास केंद्रित हैं। ऐसे में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार कर प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कुल मिलाकर, 4 मई के बाद होने वाला संभावित कैबिनेट विस्तार बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाला हो सकता है। इसमें जहां अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन देखने को मिलेगा, वहीं राजू तिवारी जैसे नेताओं की संभावित एंट्री से सियासी समीकरण भी नए सिरे से तय हो सकते हैं।
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