Friday, June 12, 2026

केतली, कुर्सी और राष्ट्रनिर्माण की उबलती राजनीति: कहानी चाय वाले चौकीदार की

-Advertise with US-

ले लोटाः देश के मशहूर “चाय वाले चौकीदार” की कहानी किसी मसालेदार बॉलीवुड पटकथा से कम नहीं लगती। कभी रेलवे प्लेटफॉर्म पर चाय की केतली के साथ सपने उबालने वाला यह किरदार आज पूरे देश की उम्मीदों, नारों और चुनावी चर्चाओं का मुख्य रसोइया बन चुका है।

मंच पर आते ही इनके शब्द ऐसे उड़ते हैं, मानो हर वाक्य 56 इंच की छाती नापकर ही बाहर निकला हो। भाषणों में इतिहास, भूगोल, संस्कृति, विकास और विपक्ष-सब एक ही कड़ाही में पकते दिखाई देते हैं। विरोधी सवाल पूछें तो जवाब में कभी मुगलों का अध्याय खुल जाता है, तो कभी विश्वगुरु भारत का भविष्य।

“मन की बात” में आवाज इतनी आत्मीय लगती है कि रेडियो भी भावुक होकर वॉल्यूम बढ़ा ले। विदेश यात्राएँ ऐसी कि पासपोर्ट भी कभी-कभी छुट्टी की अर्जी देने का मन बना ले। समर्थक उन्हें विकास पुरुष, राष्ट्रनायक और ब्रांड इंडिया का सबसे चमकदार चेहरा मानते हैं, जबकि आलोचक राजनीति का सबसे सफल इवेंट मैनेजर।

लेकिन सच यह है कि राजनीति की इस चाय में मसाला भरपूर है-कभी तीखा राष्ट्रवाद, कभी मीठा भावनात्मक संवाद, तो कभी कड़क चुनावी तड़का। देश का हर नागरिक इस चाय की चुस्की पर अपनी राय देता है। कोई इसे “अमृत” कहता है, कोई “ओवर बॉयल्ड,” लेकिन एक बात तय है-यह चाय कभी फीकी नहीं पड़ती, और जनता अगली केतली का इंतज़ार हमेशा करती रहती है।

- Advertisement -
News Stump
News Stumphttps://www.newsstump.com
With the system... Against the system

Related Articles

-Advertise with US-

लेटेस्ट न्यूज़

Intagram

108 Followers
Follow