ऑटो डेस्क: भारत में बदलते मौसम, लगातार बारिश और खराब सड़कों के कारण अब कारों में Anti-rust coating करवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। समय पर Anti-rust treatment कराने से वाहन की उम्र बढ़ाई जा सकती है और महंगे रिपेयर खर्च से बचा जा सकता है।
दरअसल, कार का अंडरबॉडी हिस्सा, चेसिस और दरवाजों के किनारे सबसे ज्यादा नमी और मिट्टी के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे लोहे के हिस्सों में जंग लगने लगती है, जिससे वाहन कमजोर हो सकता है। खासकर बारिश और कीचड़ वाले क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
एंटी-रस्ट कोटिंग के प्रमुख फायदे
Anti-rust coating वाहन के धातु वाले हिस्सों पर एक सुरक्षा परत बनाती है, जो पानी और हवा से सीधे संपर्क को रोकती है। इससे जंग लगने की संभावना काफी कम हो जाती है।
इसके अलावा:
- कार की बॉडी और चेसिस लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
- वाहन की रीसेल वैल्यू बेहतर बनी रहती है।
- अंडरबॉडी से आने वाली आवाज और कंपन में भी कुछ हद तक कमी आती है।
- भविष्य में होने वाले महंगे बॉडी रिपेयर से बचाव होता है।
कितने समय पर करवानी चाहिए कोटिंग?
नई कार में शुरुआती 6 से 12 महीने के भीतर एंटी-रस्ट कोटिंग कराना फायदेमंद माना जाता है। वहीं सामान्य उपयोग में हर 2 से 3 साल में इसकी जांच और जरूरत पड़ने पर दोबारा कोटिंग कराने की सलाह दी जाती है।
यदि वाहन ज्यादा बारिश, पानी या कीचड़ वाले इलाकों में चलता है, तो 1.5 से 2 साल के भीतर दोबारा Anti-rust treatment करवाना बेहतर माना जाता है। बिहार जैसे राज्यों में, जहां मानसून के दौरान सड़कों पर लंबे समय तक पानी और कीचड़ रहता है, वहां वाहन मालिकों को समय-समय पर अंडरबॉडी जांच जरूर करानी चाहिए।
क्या नई कारों में भी जरूरी है Anti-rust coating?
आजकल कई कार कंपनियां फैक्ट्री-फिटेड एंटी-कोरोजन प्रोटेक्शन देती हैं। हालांकि अतिरिक्त अंडरबॉडी कोटिंग वाहन को और बेहतर सुरक्षा दे सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां सड़कें और मौसम चुनौतीपूर्ण हों।
ध्यान रखने वाली बातें
Anti-rust coating हमेशा भरोसेमंद सर्विस सेंटर से ही करवानी चाहिए। कोटिंग से पहले अंडरबॉडी की अच्छी तरह सफाई और ड्राईिंग जरूरी होती है। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली रबराइज्ड या पॉलीयूरीथेन कोटिंग अधिक टिकाऊ मानी जाती है।
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