Friday, March 20, 2026

अंचल कार्यालयों में हड़ताल से कामकाज ठप, जनता परेशान; राजस्व व्यवस्था पर गहरा असर

-Advertise with US-

पटनाः बिहार में अंचल कार्यालयों के बंद रहने और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल का असर अब व्यापक रूप से आम जनता पर दिखने लगा है। महीनों से जारी इस स्थिति के कारण ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले अंचल कार्यालयों में लगभग सभी आवश्यक कार्य ठप पड़े हैं।

बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने प्रेस वार्ता में कहा कि जमाबंदी, दाखिल-खारिज, भूमि विवादों के निपटारे, आय-निवास-ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी करने से लेकर आपदा प्रबंधन तक-सभी प्रक्रियाएं अंचल कार्यालयों पर निर्भर हैं। अधिकारियों की हड़ताल के चलते इन सेवाओं का पूरी तरह से ठप हो जाना आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है।

जमीन से जुड़े काम ठप, शादी-ब्याह पर असर

वर्तमान स्थिति में जमीन की खरीद-बिक्री, भूमि सुधार और दाखिल-खारिज जैसे जरूरी कार्य लंबित हैं। कई परिवारों को शादी-ब्याह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों के लिए जमीन बेचने या खरीदने में कठिनाई हो रही है। छोटे-छोटे राजस्व विवादों के उलझे रहने से लोगों को आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

RTPS सेवाएं बाधित, पंचायत चुनाव पर असर

RTPS के तहत मिलने वाले प्रमाण पत्र भी जारी नहीं हो पा रहे हैं। इससे आम नागरिकों को रोजमर्रा के कामों में दिक्कत हो रही है। साथ ही आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए कई विकास योजनाएं और स्थानीय कार्य एनओसी के अभाव में अटक गए हैं।

- Advertisement -

भूमि विवाद बढ़े, ग्राम कचहरियों पर दबाव

सबसे गंभीर असर भूमि विवादों पर पड़ा है। पहले अंचल स्तर पर जनता दरबार के माध्यम से कई मामलों का समाधान हो जाता था, लेकिन अब सुनवाई बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विवाद, मारपीट और अपराध की घटनाओं में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। ग्राम कचहरियों पर मामलों का अतिरिक्त दबाव भी बढ़ गया है।

आपदा प्रबंधन भी प्रभावित

अंचल अधिकारी आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी होते हैं। फसल कटाई, आगजनी या अन्य आपदाओं के समय उनकी भूमिका बेहद अहम होती है। वर्तमान में प्रशासनिक सुस्ती के कारण इस व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

- Advertisement -

अनुमंडल और जिला स्तर पर भी समस्या

समस्या केवल अंचल स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुमंडल और जिला स्तर पर अपीलीय प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं। अनुमंडल भूमि सुधार समाहर्ता और जिला स्तर पर एडीएम के यहां मामलों की सुनवाई के लिए अनुभवी राजस्व अधिकारियों की कमी बताई जा रही है। इससे लोगों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है और प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो रहा है।

उच्च न्यायालय की टिप्पणी का हवाला

प्रेस वार्ता में बताया गया कि माननीय उच्च न्यायालय ने भी इन महत्वपूर्ण पदों पर योग्य और अनुभवी राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि निष्पक्ष और प्रभावी अपीलीय व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

अमोद कुमार निराला ने कहा कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ईमानदार हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कुछ बाधाएं समस्या के समाधान में आ रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि राजस्व और भूमि सुधार से जुड़े अधिकारियों के कार्यों का स्पष्ट बंटवारा किया जाए, जिससे विवाद समाप्त हो सके।

उन्होंने सरकार से अपील की कि अधिकारियों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता के साथ जल्द निर्णय लेकर हड़ताल समाप्त कराई जाए। साथ ही ऐसी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे आम जनता को समय पर सेवाएं और न्याय मिल सके।

वर्तमान हालात में सबसे ज्यादा प्रभावित आम नागरिक और जनप्रतिनिधि हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा पड़ सकता है।

- Advertisement -

Related Articles

-Advertise with US-

लेटेस्ट न्यूज़

Intagram

108 Followers
Follow