Tuesday, March 3, 2026

गुजरात में कोरोना से ठीक होने के बाद अचानक क्यों हो रही सरवाइवर की मौत?

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अहमदाबाद: गुजरात में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। अब तक गुजरात में कोरोना वायरस से ढाई हजार लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा देश के दूसरे कई राज्यों में कोरोना से होने वाली में मौतों से ज्यादा है। गुजरात में कुछ ऐसे भी मामले सामने हैं, जिनमें इलाज से पूरी तरह ठीक होने के बाद मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई।

हाल ही में ऐसा ही एक मामला सूरत में सामने आया, जिसमें सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित सीमर अस्पताल में इलाज के बाद एक 70 वर्षीय महिला को छुट्टी दे दी गई थी। उसकी कोरोना जांच की रिपोर्ट भी निगेटिव आ चुकी थी, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

इस घटना से मृतक का परिवार सदमे में है। डॉक्टर भी इस महिला की मौत से हैरान हैं। इसके अलावा अहमदाबाद में भी ऐसा मामला कुछ दिन पहले सामने आया था, जिसमें अस्पताल से ठीक होकर घर जा रहे एक शख्स की रास्ते में मौत हो गई थी। उसकी लाश बस स्टैंड से बरामद हुई थी।

मृतक के परिजनों ने बताया कि उनकी कोरोना जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जब वो अस्पताल से ठीक होकर घर जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी मौत हो गई।

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इसके अतिरिक्त सूरत के एक डॉक्टर की भी मौत कुछ ऐसे ही हुई। वो कोरोना से ठीक हो चुके थे और उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी थी, लेकिन अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।

गुजरात में कोरोना वायरस के अब तक 50 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। मगर कोरोना से ठीक होने के बाद मौत की घटना डॉक्टरों के लिए भी नई है। गुजरात सरकार द्वारा कोरोना से निपटने के लिए बनाई गई एक्सपर्ट डॉक्टरों की टास्क फ़ोर्स के सदस्यों का कहना हैं कि कोरोना की वजह से फेफड़ों में ब्लड क्लॉट होता है, जिसका असर इंसान के शरीर पर लंबे वक्त तक रहता है। कई मामलों में कोमोरबिड होने की वजह से हाइपर इंफ्लामेटरी फंड हाइपर क्लोटिंग पर कोरोना का असर होता है।

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डॉक्टरों का कहना है कि क्लोटिंग का असर कोरोना मरीज़ पर ठीक होने के एक दिन से लेकर 45 दिन तक रहता है, जिन मरीजों पर कोरोना का असर ज्यादा होता है, उनको ब्लड थीनर के इन्जेक्शन दिए जाते हैं, ताकि मरीज हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोक से बच सकें। गुजरात में कोरोना से ठीक होने के बाद जिन मामलों में मरीजों की मौत हुई, उनमें प्रमुख वजह दिल का दौरा और ब्रेन स्ट्रोक हैं।

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