विश्व पर्यावरण दिवस: इंसान के लिए अभिशाप, लेकिन प्रकृति के लिए हितकरी है “कोरोना”

अभय पाण्डेय
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नई दिल्लीः यह सच है कि सदी की सबसे बड़ी त्रासदी कोरोना ने मानव जाति को तबाह कर दिया है, लेकिन इस बात से भी परहेज नहीं किया जा सकता कि इस ने मानव हित में पर्यावरण को संवार दिया है। हर साल कि तरह आज भी पूरा विश्व पर्यावरण दिवस मना रहा है। लोग अपने पर्यावरणप्रेम को ऐसे जाहिर कर रहे हैं जैसे सब ने प्रकृति की रक्षा का संकल्प ले लिया है और अब ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे,जो उसके विरूद्ध हो। लेकिन सच तो यह है कि अब तक हमने सिर्फ पर्यावरण प्रेम का नाटक किया है और उसे बर्बाद करने की हर संभव कोशिश ही की है।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक जो काम हम इंसान नहीं कर पाए उसे कोरोना नाम की इस महामारी ने महज़ कुछ महीनों में ही कर दिया है। इस वायरस ने कुछ ऐसे सकारात्मक बदलाव किए हैं, जिससे प्रकृति अपने मूल स्वरूप में लौटने लगी है । भारत, ब्रिटेन, इटली, चीन और अन्य देशों में कोरोना काल के दौरान प्रदूषण का स्तर तेजी से कम हुआ है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।

पर्यावरण, खाद्य और कृषि विभाग द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जाने वाली यूके की सभी 165 साइटों पर प्रदूषण का स्तर बहुत कम है। भारत, इटली, फ्रांस, स्पेन, स्विटजरलैंड और चेक गणराज्य के कई शहरों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जो इस बात को दर्शाती हैं कि कोरोना ने पर्यावरवरणहित में बड़ा योगदान दिया है।

सैटलाइट सिस्टम इटली और चीन में कोरोना की शुरूआत के कुछ दिनों बाद से ही नाइट्रोजन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दिखाते हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के आंकड़े भी उत्तरी इटली में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में तेज कमी दिखाते हैं। स्पेन में भी उत्सर्जन स्तर कम होने लगे हैं। यहां तक कि कोरोना के कथित जन्मदाता चीन में भी हवा की गुणवत्ता पहले से कहीं अधिक बेहतर हुई है।

बात भारत की करें तो, यहां भी पर्यावरण में काफी बदलाव हुए हैं। राजधानी दिल्ली हो या मायानगरी मुंबई, पूरा मंज़र बदला नज़र आता है। सुबह अक्सर अलार्म से खुनने वाली नींद अब परिंदों के शोर से खुलती है। गंगा, यमुना, सरयू सहित सभी नदियों के जल इतने साफ हो गए हैं कि तह में बैठी मिट्टी भी स्पष्ट दिखाई पड़ रहे हैं। यानी हज़ारों करोड़ ख़र्च करके भी जो काम सरकार भी नहीं कर पाई कोरोना ने वो कर दिखाया। इसी तरह इटली की वेनियन नहरें जो आमतौर पर बहुत मैली होती हैं उनका पानी उस बिंदु तक स्पष्ट हो गया है जहाँ लोग मछली की तस्वीरें ले रहे हैं।

विशेषज्ञों की मानें, तो कोरोना की वजह से वाहनों के परिचालन का कम होना, भीड़ का कम होना, ध्वनी का कम होना प्रदूषण के स्तर में कमी आने का एक प्रमुख कारण है। हालांकि मौसम के आधार पर प्रदूषण का स्तर अलग-अलग होता है, लेकिन निश्चित रूप से जितना कम प्रदूषण होगा मौसम उतना ही अच्छा होगा।

कुल मिलाकर कोरोना पर्यावरण के लिए हितकारी साबित हो रहा है। इससे मिल रहे संकेत यह कहते हैं कि हमें अपने जीवनशैली में उन बदलावों की जरूरत है जिसका हमने कोरोना काल में अनुसरण किया है।

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आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।
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