पटना: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भारी दबाव में नजर आ रहे हैं। विपक्ष के साथ-साथ अब एनडीए के भीतर से भी इस एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे हैं। गठबंधन के कई बड़े नेताओं ने भरत तिवारी के पक्ष में आवाज उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
NDA के भीतर से उठे सवाल
बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, शीक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा, JD (U) विधायक अमरेन्द्र पाण्डेय और बीजेपी MLC पवन सिंह समेत NDA के कई बड़े नेताओं ने मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। इन नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए भरत तिवारी के परिजनों को न्याय दिलाने और निष्पक्ष जांच का भरोषा दिलाया है।
सरकार पर बढ़ता दबाव
भरत तिवारी की मौत के बाद मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ता गया। NDA के भीतर से उठ रही आवाजों ने सरकार की स्थिति को असहज कर दिया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में सरकार विपक्ष के निशाने पर रहती है, लेकिन इस बार सहयोगी दलों के रुख ने दबाव और बढ़ा दिया है।
मंत्री अशोक चौधरी का बयान
मंत्री अशोक चौधरी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कोई नहीं लड़ेगा तो वे खुद भरत तिवारी का केस लड़ेंगे। पुलिस अब तक अच्छा काम कर रही थी, लेकिन इस मामले ने सभी को असहज कर दिया है। शाहाबाद क्षेत्र में इस घटना ने राजनीतिक रूप से माहौल को बैकवर्ड-फॉरवर्ड कर दिया है।
जनाक्रोश और प्रशासनिक कार्रवाई
भारी जनाक्रोश और गठबंधन के भीतर से उठ रही आवाजों के बीच आखिरकार भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन के आधार पर जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर थाने के तत्कालीन SHO राजेश मालाकार समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया। भोजपुर SP राज ने इसकी पुष्टि की है।
बता दें, घटना के बाद शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद भी FIR दर्ज नहीं हो सकी थी। इसके बाद अब जाकर मामला दर्ज किया गया है।
जांच प्रक्रिया जारी
हालांकि मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने का निर्णय ले लिया था। सरकार की ओर से एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। आयोग को पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।
बिहार पुलिस मुख्यालय ने भी स्वीकार किया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान गंभीर स्तर पर चूक हुई थी। पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में ADG (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने माना कि 16 जून को पुलिस टीम जब भरत तिवारी के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची थी, तब पूरे ऑपरेशन को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया।
ADG ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पुलिस अधिकारियों और जवानों की लापरवाही सामने आई है। इसी आधार पर शाहपुर थाना प्रभारी राजेश मालाकार, दो दारोगा, एक सहायक अवर निरीक्षक (ASI) और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
बढ़ता राजनीतिक दबाव
इन सभी घटनाक्रमों के बावजूद सरकार पर दबाव कम नहीं हुआ और FIR दर्ज करनी पड़ी। हालांकि इसके बाद भी जनाक्रोश और NDA के भीतर बयानबाजी थमती नहीं दिख रही है। लोगों का कहना है कि जब तक भरत के दोषियों को सजा नहीं हो जाती तब तक ना आंदोलन थमेगा ना सरकार का विरोध।
राजनीतिक स्थिति
राजनीतिक हलकों में इसे सम्राट चौधरी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें इस मामले में विपक्ष के साथ-साथ अपने ही सहयोगियों के सवालों का भी सामना करना पड़ रहा है।
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