पटनाः भोजपुर के शाहपुर थाना अन्तर्गत बिलौटी गांव का भरत तिवारी प्रकरण अब महज एक एनकाउंटर विवाद नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता, पुलिस की जवाबदेही और सामाजिक प्रतिनिधित्व की एक गंभीर राजनीतिक परीक्षा बन चुका है। खास बात यह है कि विरोध की आवाज सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से भी उठ रही है।
भरत तिवारी की कथित मुठभेड़ के बाद जिस तरह राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हुई है, उसने इस पूरे प्रकरण को राज्यव्यापी बहस का विषय बना दिया है। अब यह मामला सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि न्याय, मानवाधिकार और सामाजिक सम्मान के सवालों से भी जुड़ चुका है।
विजय सिन्हा: जवाबदेही तय हो
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में कृषि मंत्री का पद संभाल रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय सिन्हा ने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई में चूक हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि कानून से बाहर जाकर किसी को कार्रवाई की छूट नहीं दी जा सकती। साथ ही निष्पक्ष जांच की मांग की।
मिथिलेश तिवारी: गोली क्यों चली?
प्रदेश के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पूछा कि अगर भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो गोली क्यों चलाई गई। उन्होंने इसे गंभीर और संदिग्ध बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की।
अशोक चौधरी: अंतिम संस्कार की भीड़ ने उठाए सवाल
बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री और JD(U) के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने कहा कि अगर भरत तिवारी अपराधी था, तो उसके अंतिम संस्कार में इतनी भीड़ क्यों उमड़ी। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को संवेदनशीलता से देखने की जरूरत बताई।
चिराग पासवान: निर्दोष के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं
केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि किसी निर्दोष के साथ अन्याय लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
अश्विनी चौबे: कानून सबसे ऊपर
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि कानून का पालन हर हाल में होना चाहिए। अगर पुलिस से गलती हुई है तो कार्रवाई जरूरी है।
आर. के. सिन्हा: पुलिस सीमा में रहे
पूर्व सांसद आर. के. सिन्हा ने कहा कि पुलिस का काम कानून लागू करना है, खुद कानून बनना नहीं। उन्होंने न्यायिक जांच को जरूरी बताया।
ऋतुराज सिन्हा: रक्षक भक्षक न बनें
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि “रक्षक अगर भक्षक बन जाएं तो समाज का भरोसा टूट जाता है।” उन्होंने इसे पुलिस जवाबदेही का गंभीर मामला बताया और न्यायिक जांच की मांग की।
आनंद मिश्रा: एनकाउंटर प्रक्रिया पर सवाल
बक्सर से BJP के विधायक पूर्व IPS आनंद मिश्रा ने कहा कि एनकाउंटर की एक तय प्रक्रिया होती है। अगर आत्मसमर्पण के बाद गोली चली है, तो यह गंभीर उल्लंघन है।
पवन सिंह: न्याय मिलना चाहिए
हाल हीं में भाजपा कोटे से MLC बने भोजपुरी फिल्म अभिनेता पवन सिंह ने दुख जताते हुए कहा कि अगर भरत तिवारी के साथ गलत हुआ है तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।
राजन तिवारी: लोकतंत्र पर सवाल
पूर्व विधायक और भाजपा नेता राजन तिवारी ने इस घटना को लोकतंत्र पर धब्बा बताया है। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया से सच्चाई सामने आनी चाहिए थी।
अभयानंद: SOP का पालन जरूरी
बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने कहा कि हर मुठभेड़ में SOP का पालन जरूरी है। अगर आत्मसमर्पण हुआ था, तो गोली चलाने का औचित्य जांच का विषय है।
गुप्तेश्वर पांडेय: सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन सर्वोपरि
बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन हर हाल में होना चाहिए। अगर प्रक्रिया में गलती हुई है तो जांच और कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।
इन तमाम प्रतिक्रियाओं से साफ है कि भरत तिवारी प्रकरण अब केवल एक स्थानीय पुलिस मुठभेड़ नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति, पुलिसिंग और सामाजिक न्याय की बड़ी बहस बन चुका है। आने वाले दिनों में इसकी जांच और निष्कर्ष राज्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
