भोजपुरः बिहार भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और शाहपुर क्षेत्र के सक्रिय जननेता रहे विशेश्वर ओझा की 10वीं पुण्यतिथि पर गुरूवार को एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। शाहपुर हाईस्कूल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में राजनीतिक प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में राजनीतिक दिग्गजों से लेकर आम समर्थकों तक, हर वर्ग की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि एक दशक बाद भी ओझा की स्मृति जनमानस में जीवित है।
सभा में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी, बक्सर विधायक आनंद मिश्रा, बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी, सुगौली विधायक बब्लू गुप्ता समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने उनके सामाजिक सरोकार, जनसंपर्क और संगठनात्मक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें स्पष्टवादी, निर्भीक और संगठन के प्रति समर्पित नेता बताया।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कार्यक्रम का आयोजन विशेश्वर ओझा के पुत्र और शाहपुर नवनिर्वाचित विधायक राकेश ओझा, भाई मुक्तेश्वर ओझा तथा परिजनों द्वारा किया गया। सभा में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी।
जब गोलियों ने छीन ली एक जननेता की जान
12 फरवरी 2016 की रात भोजपुर की राजनीति के लिए एक काला अध्याय बन गई। विशेश्वर ओझा एक मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे थे। शाहपुर थाना क्षेत्र में अपराधियों ने उनकी गाड़ी को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग की। कई गोलियां लगने से वे गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल ले जाने के दौरान उनका निधन हो गया।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल था। समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताया और त्वरित कार्रवाई की मांग की।
हत्या के बाद सख्त कार्रवाई, कई कोणों से हुई जांच
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को नामजद कर गिरफ्तार किया और मामले की गहन जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में इसे एक सुनियोजित हमला बताया गया, जिसकी विभिन्न कोणों से पड़ताल की गई। चूंकि विशेश्वर ओझा क्षेत्र की राजनीति में एक प्रभावशाली और व्यापक जनाधार वाले नेता थे, इसलिए यह मामला स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया। विभिन्न दलों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष और शीघ्र न्याय की मांग की।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद सात दोषी करार
मामले की सुनवाई लंबी चली। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर वर्ष 2024 में अदालत ने सात आरोपियों को दोषी ठहराया। मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य को विभिन्न धाराओं में कारावास एवं अर्थदंड दिया गया।
सुनवाई के दौरान गवाह की हत्या से बढ़ी संवेदनशीलता
इस केस से जुड़ी एक और दुखद घटना 2018 में सामने आई, जब एक प्रमुख गवाह कमल किशोर मिश्रा की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के दिन कमल किशोर सुबह पशु के लिए चारा लेकर घर लौट रहे थे तभी पहले से घात लगाए अपराधियों ने उनपर हमला कर दिया। किशोर को 7-8 गोलियां लगी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इससे मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता का अंदाजा लगाया गया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
विशेश्वर ओझा की हत्या ने उस समय राज्य की राजनीति में व्यापक बहस छेड़ दी थी। कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठे और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि अदालत के फैसले के बाद परिवार और समर्थकों ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जनस्मृतियों में जीवित एक जननेता
दस वर्षों बाद भी शाहपुर में विशेश्वर ओझा का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि वे केवल एक राजनीतिक पदाधिकारी नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच सक्रिय और सुलभ जननेता थे। पुण्यतिथि के अवसर पर मंच से बार-बार यही भाव व्यक्त हुआ -“व्यक्ति भले चला जाता है, लेकिन उसके विचार, संघर्ष और जनसेवा की विरासत समाज में जीवित रहती है।”
