पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपने भरोसेमंद और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी आलोक राज पर विश्वास जताया है। सेवानिवृत्ति के बाद 1989 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक राज को बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब राज्य की भर्ती व्यवस्था पारदर्शिता, समयबद्धता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवालों के घेरे में रही है।
आलोक राज की पहचान एक तेजतर्रार, अनुशासित और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में रही है। सेवा काल के अंतिम चरण में वे बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक-सह-प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत थे और प्रशासनिक दक्षता के लिए जाने जाते थे।
तीन दशक का प्रशासनिक अनुभव, पुलिस से लेकर नीति तक
1989 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक राज ने अपने लंबे करियर में कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। वे राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) भी रह चुके हैं, जो बिहार की कानून-व्यवस्था का सर्वोच्च पद माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने कई जिलों और विशेष इकाइयों में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाईं।
उनकी कार्यशैली की पहचान रही है—
- सख्त अनुशासन
- निर्णय लेने की क्षमता
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर मजबूत पकड़
यही कारण है कि सेवा निवृत्ति के बाद भी राज्य सरकार ने उन्हें एक ऐसे आयोग की जिम्मेदारी सौंपी है, जो सीधे तौर पर लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
BSSC: युवाओं के लिए सबसे अहम आयोग
बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में ग्रुप ‘बी’ और ग्रुप ‘सी’ के पदों पर भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है। आयोग के माध्यम से हर साल हजारों पदों पर नियुक्तियाँ होती हैं।
लेकिन बीते कुछ वर्षों में BSSC बार-बार परीक्षा में देरी, परिणाम लंबित रहने, चयन प्रक्रिया पर सवाल और कभी-कभी विवादों के कारण चर्चा में रहा है। ऐसे में आयोग के चेयरमैन का पद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि विश्वास बहाली की जिम्मेदारी भी अपने साथ लाता है।
इनसे पहले कौन था चेयरमैन?
आलोक राज से पहले BSSC का नेतृत्व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में रहा है। आयोग का यह पद पहले भी विवादों और बदलावों से गुजरा है। अतीत में प्रश्नपत्र लीक और प्रक्रिया में गड़बड़ियों ने आयोग की साख को नुकसान पहुँचाया था। यही कारण है कि सरकार अब ऐसे अधिकारी को आगे लाई है, जिसकी छवि कठोर लेकिन निष्पक्ष प्रशासक की रही है।
आलोक राज की जिम्मेदारियाँ क्या होंगी?
BSSC चेयरमैन के तौर पर आलोक राज के सामने कई अहम जिम्मेदारियाँ होंगी—
- सभी भर्ती परीक्षाओं को समय पर आयोजित कराना
- चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना
- तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर मानवीय हस्तक्षेप को कम करना
- उम्मीदवारों के बीच आयोग की विश्वसनीयता दोबारा स्थापित करना
- लंबित भर्तियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराना
यह जिम्मेदारी प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ सख्त नियंत्रण और संवेदनशील दृष्टिकोण की मांग करती है।
सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी ही नहीं, एक बड़ी जवाबदेही भी होगी
आलोक राज को BSSC जैसी महत्वपूर्ण संस्था का चेयरमैन बनाए जाने से यह साफ हो गया है कि आईपीएस के रूप में अपने सेवाकाल के दौरान उनकी छवि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार की नजर में कितनी मजबूत रही है। अब उस भरोसे पर खरा उतरना उनके लिए केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक बड़ी जवाबदेही भी होगी। इसके साथ ही उनके सामने कई अहम चुनौतियाँ भी खड़ी होंगी।
आलोक राज के सामने क्या होगी सबसे बड़ी चुनौती?
बिहार में सरकारी नौकरी केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठने वाला हर सवाल सीधे तौर पर सरकार, प्रशासन और पूरी व्यवस्था की साख पर असर डालता है। लिहाजा, इस पद पर रहते आलोक राज के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) पर युवाओं का टूटा हुआ भरोसा दोबारा कायम करना होगी।
हालांकि, आलोक राज का लंबा पुलिस और प्रशासनिक अनुभव यह संकेत देता है कि वे इस चुनौती से निपटने के लिए कठोर और निर्णायक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना यह होगा कि वे अपने अनुभव और अनुशासन के बल पर BSSC को कितनी जल्दी भरोसे की पटरी पर वापस ला पाते हैं।
नीतीश कुमार सरकार का यह फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि राज्य सरकार अब भर्ती आयोगों को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पूर्व DGP आलोक राज की नियुक्ति को प्रशासनिक सख्ती, पारदर्शिता और स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि आलोक राज अपने अनुभव और अनुशासन के बल पर BSSC को विवादों से निकालकर भरोसे की पटरी पर कितनी जल्दी ला पाते हैं।