पटनाः बिहार न्यायपालिका के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जस्टिस मीनाक्षी मदन राय (Justice Meenakshi Madan Rai) ने पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। वह पटना हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनी हैं। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
केंद्र सरकार ने 2 जून 2026 को उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 मई 2026 को उनके नाम की सिफारिश की थी। उनकी नियुक्ति तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रभावी हुई।
कौन हैं जस्टिस मीनाक्षी मदन राय?
Justice Meenakshi Madan Rai का जन्म 12 जुलाई 1964 को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में हुआ था। उनके पिता मदन मोहन रसाइली सिक्किम सरकार में गृह सचिव रह चुके थे, जबकि उनकी मां रबी माला रसाइली शिक्षिका थीं।
उन्होंने शुरुआती शिक्षा सिक्किम में प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की।
न्यायिक करियर
साल 1990 में उन्होंने वकालत शुरू की और बाद में सिक्किम न्यायिक सेवा से जुड़ीं। उन्होंने न्यायपालिका में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वर्ष 2015 में उन्हें सिक्किम हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया। वह सिक्किम हाईकोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश भी बनीं।
उन्होंने कई बार सिक्किम हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। न्यायिक प्रशासन और संवैधानिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए चुना।
बिहार न्यायपालिका के लिए ऐतिहासिक क्षण
पटना हाईकोर्ट की स्थापना वर्ष 1916 में हुई थी। 100 वर्षों से अधिक पुराने इस संस्थान को पहली बार महिला मुख्य न्यायाधीश मिली हैं। इसे न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस राय का अनुभव और प्रशासनिक क्षमता बिहार की न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकती है।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
Justice Meenakshi Madan Rai की नियुक्ति केवल न्यायपालिका के लिए ही नहीं, बल्कि देशभर की महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है। उन्होंने अपने लंबे न्यायिक अनुभव और मेहनत के दम पर देश की शीर्ष न्यायिक जिम्मेदारियों में जगह बनाई है।
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