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Friday, September 24, 2021

Corona impact on lifestyle: काढ़े की बढ़ती मांग से खुलने लगे काढ़ा कैफे

रायबरेलीः कोरोना काल में काढ़े ने देश के घर-घर में दस्तक दे दी है (Corona impact on lifestyle), आलम यह है कि कभी स्वाद के मामले में पसंद न आने वाला काढ़ा अब लोगों का पंसदीदा पेय बनता जा रहा है। कोरोना के कारण मजबूरी में बना आयुर्वेदिक और घरेलू चीजों से तैयार यह बेहतरीन पेय घर-घर में स्थान बना चुका है। घरों में तो यह रोजाना के मेन्यू में शामिल हो ही गया है, अब तो चाय की दुकानों में भी इसकी मांग होने लगी है, जिसकी वजह से कई स्थानों में काढ़ा कैफे (decoction cafe)  तक खुल गए हैं। हालांकि इनकी संख्या बहुत कम है, लेकिन आने वाले समय में यह चाय और रेस्तरांओं के मेन्यू में प्रमुख स्थान बना ले, तो आश्चर्य नहीं है।

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गावों में खुले काढ़ा कैफे

दरअसल उत्तर प्रदेश के रायबरेली के गावों में काढ़ा कैफे (decoction cafe) के खुलने से अब इसका स्वाद घर के बाहर भी मिल सकेगा। रायबरेली के सातवं में लोहड़ा गांव में रविवार को इस अभिनव प्रयोग की शुरुआत हुई और इसका श्रेय जाता है, मशहूर व्यंगकार और कवि पंकज प्रसून को।

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उन्होंने ‘आओ गांव बचाएं मुहिम’ के तहत पहले से चल रहे कोविड केयर सेंटर में इसका शुभारंभ किया। अब यहां लोगों को कुल्हड़ में काढ़ा उपलब्ध कराया जा रहा है (Corona impact on lifestyle)। इसके अलावा आसपास के और जिले के अन्य चाय की दुकानों को भी इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। कई दुकानों ने तो इसकी शुरुआत भी कर दी।

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चाय की दुकानों पर भी काढ़ा होगा उपलब्ध

जिले के ही लालगंज में चाय की दुकान चला रहे रामनरेश का कहना है कि ग्राहक काढ़ा की मांग अब करते हैं और जल्द ही वह अपने दुकान में इसकी व्यवस्था करेंगे। गुरुबख्शगंज के ही चाय दुकानदार जगदीश के अनुसार वह भी अपने दुकान में इसे बनाने की शुरुआत करने वाले हैं। इसी तरह कई चाय स्टॉल चलाने वाले अब इसे भी अपने यहां बनाने की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। कोरोना के कारण चर्चा में आया ‘काढ़ा’ अब घरों से निकलकर बाजार तक पहुंच गया है और जल्दी ही यह ग्राहकों को आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

इम्यूनिटी को बढ़ाता है ‘काढ़ा’

कोरोना काल मे इम्यूनिटी बढ़ाने का सबसे कारगर तरीका काढ़ा पीने को माना गया। ज्यादातर शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि काढ़ा कोरोना के खिलाफ़ एक अचूक अस्त्र है। कोरोना काल के दौरान तुलसी के पत्ते, लौंग, अदरक, दालचीनी, कालीमिर्च आदि से तैयार काढ़ा लोगों ने खूब उपयोग किया और अब काफी लोगों ने इसे दिनचर्या में शामिल कर लिया है।

आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार रोजाना दो बार काढ़ा का सेवन करने से छाती में मौजूद बलगम भी खत्म हो जाता है और सांस न ले पाने की समस्या भी खत्म हो जाती है। हालांकि इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि अधिक गर्म और  ज्यादा काढ़ा पीने से परहेज करना चाहिए।

अभय पाण्डेय
आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

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