पटनाः लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक और विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के सचेतक राजू तिवारी ने राज्य के सभी प्रखंडों में विद्युत शवदाह गृह के निर्माण की मांग उठाई है। मंगलवार को उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए।
पर्यावरणीय चिंता और बढ़ती लागत का मुद्दा
सदन में अपनी बात रखते हुए तिवारी ने पर्यावरणीय प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक दाह-संस्कार के लिए लकड़ियों की लगातार बढ़ती कमी और लागत आम लोगों के लिए आर्थिक बोझ बनती जा रही है। साथ ही, लकड़ी आधारित दाह-संस्कार से वनों पर दबाव बढ़ता है और पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और वैज्ञानिक तरीके से संचालित विद्युत शवदाह गृहों की स्थापना समय की आवश्यकता बन चुकी है।
अधिकांश प्रखंडों में सुविधा का अभाव
विधायक ने बताया कि वर्तमान में बिहार के अधिकांश प्रखंडों में विद्युत शवदाह गृह की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसके कारण आम नागरिकों को दाह-संस्कार के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर पारंपरिक संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
तिवारी ने कहा कि यदि प्रत्येक प्रखंड में विद्युत शवदाह गृह स्थापित किए जाएं तो इससे न केवल लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि वनों पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
सनातन परंपरा और पर्यावरण संरक्षण
राजू तिवारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि शवदाह हमारी सनातनी परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है। लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण की रक्षा भी सनातन धर्म का परम कर्तव्य है।
उन्होंने कहा, “आज जब पूरा देश और समूची मानव सभ्यता प्रदूषण की चपेट में है, ऐसे में वृक्ष ही हमें और हमारे पर्यावरण को बचाने में सहायक हैं। पेड़ों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है और इस दिशा में जो भी संभव हो, उसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।”
सरकार से ठोस पहल की अपेक्षा
तिवारी ने सरकार से मांग की कि सभी प्रखंड मुख्यालयों में चरणबद्ध तरीके से विद्युत शवदाह गृहों का निर्माण कराया जाए और इसके लिए आवश्यक बजट प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी, बल्कि आम जनता को सम्मानजनक और सुविधाजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी उपलब्ध कराएगी।
