Wednesday, June 24, 2026

भरत तिवारी एनकाउंटर पर NDA में दो सुर: मांझी के बयान पर चिराग का तीखा जवाब

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पटनाः भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब NDA के भीतर ही अलग-अलग सुर खुलकर सामने आने लगे हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी जहां एनकाउंटर को सही ठहराते हुए सवाल उठाने वालों पर निशाना साध रहे हैं, वहीं चिराग पासवान ने उनके बयान से साफ दूरी बना ली है और इसे मानवीय संवेदना के खिलाफ बताया है।

मांझी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर लिखा था कि “दलितों का एंकाउंटर हो तो नक्सली, मुसलमान का एंकाउंटर हो तो आतंकवादी कहा जाता है, लेकिन भरत तिवारी के एनकाउंटर पर वही लोग सवाल उठा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा था कि भरत तिवारी के पास अवैध पिस्टल थी और पहले भी उसकी गिरफ्तारी हो चुकी थी।

चिराग का सीधा जवाब

मांझी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चिराग पासवान ने बेहद तल्ख शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति की हत्या को “मारा तो मारा गया” कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।

चिराग ने कहा, “मेरे सहयोगी हैं, सम्मानित हैं, बड़े हैं, बुजुर्ग हैं, आदरणीय हैं, लेकिन इस तरीके से नहीं। एक बिहारी और बिहारी ही नहीं, कोई भी व्यक्ति—वह किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या प्रदेश से आता हो—उसकी हत्या को आप ऐसे नहीं कह सकते कि मर गया तो मर गया।”

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उन्होंने आगे कहा, “अगर आपको उस परिवार के दर्द का एहसास नहीं है, तो उस पर नमक छिड़कने का भी कोई अधिकार नहीं है। आज अगर मैं ऐसे बयान का समर्थन करूं, तो मैं उस परिवार की आंखों में कभी नहीं देख पाऊंगा।”

गठबंधन के भीतर अलग नैरेटिव

चिराग ने यह भी माना कि उनके इस बयान को गठबंधन के भीतर मतभेद के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि नैतिकता और संवेदना के सवाल पर समझौता नहीं किया जा सकता।

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राजनीतिक तौर पर देखें तो भरत तिवारी एनकाउंटर पर अब NDA के भीतर दो अलग-अलग लाइनें साफ दिख रही हैं। मांझी जहां इस पूरे मामले को कानून-व्यवस्था और जातीय नैरेटिव के फ्रेम में रख रहे हैं, वहीं चिराग इसे मानवीय संवेदना और न्यायिक प्रक्रिया के नजरिए से देख रहे हैं।

बिहार की राजनीति में बड़ा संकेत

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एक एनकाउंटर पर मतभेद नहीं, बल्कि बिहार में दलित राजनीति के दो अलग-अलग मॉडल की झलक है। एक तरफ पहचान आधारित आक्रामक राजनीति, दूसरी तरफ संवेदना और न्याय का संतुलित नैरेटिव।

भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई नहीं रह गया है। यह NDA के भीतर राजनीतिक सोच और नैतिक दृष्टिकोण के फर्क को भी उजागर कर रहा है।

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