पटनाः भरत तिवारी प्रकरण ने बिहार की सियासत, प्रशासन और मीडिया जगत में एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक नाम अचानक फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया—वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष।
दरअसल, सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही वीडियो क्लिप्स में श्रीकांत प्रत्यूष अपने पुराने तेवर में नजर आ रहे हैं। यह क्लिप्स उनकी ग्राउंड रिपोर्ट का एक हिस्सा हैं, जिसमें वे बिना किसी लाग-लपेट, दबाव या डर के सिस्टम से सीधे सवाल करते दिखाई देते हैं—“भरत तिवारी को किसने और क्यों मारा?”
पुराना अंदाज, नया संदर्भ
यही सवाल आज भी इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी गूंज बना हुआ है। श्रीकांत प्रत्यूष की पत्रकारिता हमेशा अपनी जमीनी पकड़, निर्भीकता और सत्ता से सीधे सवाल पूछने के अंदाज के लिए पहचानी जाती रही है। यही वजह है कि भरत तिवारी प्रकरण के बीच उनकी यह रिपोर्ट एक बार फिर प्रासंगिक हो उठी है।
श्रीकांत ने न सिर्फ भरत तिवारी कांड से जुड़े हर पहलू पर विस्तृत रिपोर्टिंग की, बल्कि उन सवालों के जवाब तलाशने की भी कोशिश की, जो आगे चलकर इस पूरे मामले की अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
जब Zee News ने याद किया श्रीकांत का पुराना अंदाज
यह रिपोर्ट इतनी प्रभावशाली रही कि देश के अग्रणी समाचार चैनलों में शुमार Zee News ने भी उनकी क्लिप्स को अपने चर्चित और प्रतिष्ठित शो DNA में प्रमुखता से प्रसारित किया। इतना ही नहीं, चैनल ने यह भी रेखांकित किया कि श्रीकांत प्रत्युष कभी उसी संस्थान का हिस्सा रह चुके हैं।
इस रिपोर्ट ने न सिर्फ वर्तमान बहस को धार दी, बल्कि उस दौर की यादें भी ताजा कर दीं, जब राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर अक्सर सुनाई देता था—“बिहार से श्रीकांत प्रत्यूष की रिपोर्ट।”
प्राइवेट टीवी पत्रकारिता के अग्रणी चेहरा
बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष बिहार में प्राइवेट टीवी पत्रकारिता के शुरुआती दौर के अग्रणी पत्रकारों में रहे हैं। जब यह इंडस्ट्री अपने प्रारंभिक चरण में थी, तब न संसाधन पर्याप्त थे और न ही सुविधाएं। इसके बावजूद उनकी पत्रकारिता हमेशा सत्ता और सिस्टम से सीधे सवाल पूछने का साहस रखती रही।
उनकी पत्रकारिता की विरासत
यही कारण है कि आज उनके मार्गदर्शन में पत्रकारिता सीखने वाले कई पत्रकार देश के बड़े मीडिया संस्थानों में अपने नाम और काम का लोहा मनवा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता ने केवल खबरें नहीं दीं, बल्कि पत्रकारिता की नई पीढ़ी को सवाल पूछने का साहस भी सिखाया।
आज फिर क्यों हो रही है चर्चा?
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि आज जब पत्रकारिता की निष्पक्षता और साहस को लेकर लगातार बहस हो रही है, ऐसे समय में श्रीकांत प्रत्यूष की यह रिपोर्टिंग लोगों को उस दौर की याद दिला रही है, जब पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता से सवाल पूछना और सच को सामने लाना था।
भरत तिवारी प्रकरण ने भले ही एक नए विवाद को जन्म दिया हो, लेकिन इसके बहाने पत्रकारिता के उस पुराने, निडर और बेबाक चेहरे की भी वापसी हुई है, जिसका प्रतिनिधित्व श्रीकांत प्रत्यूष जैसे पत्रकार करते रहे हैं। यही वजह है कि आज एक बार फिर यह एहसास गूंज रहा है—टाइगर अभी जिंदा है।
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