भोजपुरः भोजपुर में गंगा के उफान से बाढ़ की मुश्किलों के बीच राहत और संवेदना की एक तस्वीर सामने आई है। भोजपुर एसपी अवधेश दीक्षित की पत्नी और पूर्व IPS अधिकारी काम्या मिश्रा बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचीं और जरूरतमंद परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनीं और महिलाओं तथा बच्चों से भी बातचीत की।
Kamya Mishra बड़हरा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव के सहारे पहुंचीं। यहां उन्होंने सैकड़ों प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री अपने हाथों से बांटी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस पहल के जरिए 400 से अधिक परिवारों तक मदद पहुंचाई गई। राहत सामग्री में खाद्य सामग्री के साथ महिलाओं और बच्चियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सामग्री भी शामिल थी।
राहत वितरण के दौरान काम्या मिश्रा ने केवल सामग्री बांटने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बाढ़ पीड़ितों के बीच बैठकर उनकी परेशानियां भी सुनीं। जलजमाव, आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर लोगों से जानकारी ली। उनके साथ पुलिस के कुछ जवान भी मौजूद रहे।
आपदा के समय प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनना राहत कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे वक्त में जब बाढ़ के पानी ने लोगों की सामान्य जिंदगी को प्रभावित किया है, मदद का एक छोटा प्रयास भी पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
कौन हैं पूर्व IPS काम्या मिश्रा?
Ex-IPS Kamya Mishra मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई की और महज 22 वर्ष की उम्र में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर देशभर में 172वीं रैंक हासिल की। इसके बाद वह 2019 बैच की IPS अधिकारी बनीं। उनकी शुरुआती पोस्टिंग हिमाचल प्रदेश कैडर में हुई, जिसके बाद उनका कैडर बिहार हुआ।
बिहार में सेवा के दौरान Kamya Mishra ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। मार्च 2024 में उन्हें दरभंगा ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी दौरान वह पूर्व मंत्री मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी की हत्या के मामले की जांच के लिए गठित SIT से भी जुड़ीं और यह मामला काफी चर्चा में रहा।

हालांकि, पुलिस सेवा में करीब छह वर्ष रहने के बाद काम्या मिश्रा ने अगस्त 2024 में निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। शुरुआत में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ और उन्हें 180 दिनों की छुट्टी दी गई। बाद में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 27 मार्च 2025 को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद वह औपचारिक रूप से IPS सेवा से मुक्त हो गईं।
आज पूर्व IPS अधिकारी के रूप में काम्या मिश्रा की पहचान भले ही पुलिस सेवा से अलग हो चुकी हो, लेकिन भोजपुर के बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री बांटने की यह पहल उनके मानवीय पक्ष को सामने लाती है। बाढ़ जैसी आपदा के बीच पीड़ितों के बीच पहुंचना और उनकी जरूरतों को करीब से समझना निश्चित तौर पर एक सकारात्मक संदेश देता है।
मुश्किल वक्त में किसी के साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ी मदद है—और बाढ़ पीड़ितों के बीच काम्या मिश्रा की यह पहल इसी मानवीय संवेदना की तस्वीर पेश करती है।

