गोपालगंजः बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत का दावा करने वाली प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को हाल के दिनों में कई मोर्चों पर राजनीतिक झटकों और आंतरिक असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में गोपालगंज जिले के कुचायकोट क्षेत्र से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ता और समाजसेवी पंकज पाण्डेय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की है।
पंकज पाण्डेय, जो पूर्व पत्रकार भी रह चुके हैं और 2025 के चुनाव में 102 कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं, ने अपने इस्तीफ़े की जानकारी एक सार्वजनिक पत्र के माध्यम से दी। पत्र में उन्होंने जनसुराज के नेतृत्व, विशेषकर प्रशांत किशोर, पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उम्मीद से मोहभंग तक का सफर
पाण्डेय ने लिखा कि उन्होंने “बिहार को आगे ले जाने की उम्मीद” के साथ जनसुराज अभियान जॉइन किया था। उन्होंने बताया कि उनके स्वर्गीय पिता काली प्रसाद पाण्डेय, जो पूर्व सांसद और विधायक रहे थे, ने भी उन्हें इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया था और प्रशांत किशोर पर भरोसा जताया था।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने निजी खर्च पर कई बार पटना जाकर पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लिया और जिले में लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई – यहां तक कि उस समय भी जब उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे।
दिशा भटकने का आरोप
अपने पत्र में पाण्डेय ने आरोप लगाया कि चुनाव नज़दीक आते-आते जनसुराज “बिहार बदलाव के मूल उद्देश्य से भटक गई” और इससे “लाखों कार्यकर्ताओं का विश्वास टूट गया”। उन्होंने प्रशांत किशोर की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा कि अब उन्हें संदेह है कि बिहार की राजनीति का इस्तेमाल “निजी फायदे” के लिए किया जा रहा है।
स्थानीय मुद्दों की अनदेखी का आरोप
पंकज पाण्डेय ने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर कई बार कुचायकोट आए, लेकिन उन्होंने मंच से कभी ससमूसा मिल के मुद्दे को नहीं उठाया, जबकि पाण्डेय स्वयं लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता में निराशा बढ़ी।
जनसुराज से स्पष्ट राजनीतिक दूरी
पत्र के अंत में पाण्डेय ने कहा कि वे “आम जनमानस में किसी प्रकार का भ्रम नहीं रखना चाहते” और इसलिए जनसुराज की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहे हैं।
स्थानीय राजनीति पर असर संभव
गोपालगंज और आसपास के इलाकों में पंकज पाण्डेय की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए उनके इस्तीफ़े को जनसुराज के लिए स्थानीय स्तर पर एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। खासकर कुचायकोट क्षेत्र में यह घटनाक्रम आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल, इस मामले पर जनसुराज या प्रशांत किशोर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
