पटनाः देश के बड़े कोचिंग हब के रूप में पहचान बना चुका पटना आज छात्राओं के लिए कितना सुरक्षित है—इस सवाल का जवाब साल 2026 की शुरुआत में ही डरावने तरीके से सामने आ गया है। शहर के दो अलग-अलग निजी गर्ल्स हॉस्टलों में NEET की तैयारी कर रही छात्राओं की संदिग्ध मौतों ने न सिर्फ हॉस्टल व्यवस्था, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और महिला सुरक्षा के दावों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। Patna Girls Hostel Death Case में एक मामला परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल (Perfect Girls Hostel) का है, दूसरा शंभू गर्ल्स हॉस्टल (Shambhu Girls Hostel) का। जगह अलग है, तारिख अलग हैं, लेकिन कहानी लगभग एक जैसी—मौत, सवाल और फिर सिस्टम की खामोशी।
Perfect Girls Hostel: छात्रा की मौत, जवाब न हॉस्टल के पास न सिस्टम के पास
ताज़ा मामला परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल से सामने आया है, जहाँ औरंगाबाद की रहने वाली 15 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। छात्रा NEET की तैयारी के लिए पटना आई थी और निजी हॉस्टल में रह रही थी।
परिजनों का साफ कहना है कि उनकी बेटी किसी मानसिक तनाव में नहीं थी और आत्महत्या जैसी बात की कोई संभावना नहीं थी। इसके बावजूद उसकी अचानक हुई मौत को लेकर हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में है। आरोप है कि परिजनों को समय पर सही जानकारी नहीं दी गई और हॉस्टल में बुनियादी सुरक्षा इंतजाम तक मौजूद नहीं थे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक नाबालिग छात्रा को जिस हॉस्टल में रखा गया, वहाँ उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
Shambhu Girls Hostel: बेहोशी से मौत तक का रहस्यमय मामला
परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल की घटना से पहले कंकड़बाग इलाके के शंभु गर्ल्स हॉस्टल में भी एक छात्रा की रहस्यमय मौत हो चुकी है। मुल रूप से जहानाबाद की रहने वाली यह छात्रा भी NEET की तैयारी कर रही थी। वह अपने कमरे में बेहोशी की हालत में पाई गई थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ कई दिनों तक इलाज के बाद उसकी मौत हो गई।
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शुरुआत में मामले को आत्महत्या या दवा के ओवरडोज़ से जोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में सच्चाई कुछ और ही निकली।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली सिस्टम की परतें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर गंभीर चोटों और संघर्ष के निशान मिलने की बात सामने आई। यौन हिंसा की आशंका ने पूरे मामले को पलट दिया।
दबाव बढ़ने के बाद पुलिस को SIT का गठन करना पड़ा।
यह सवाल अब भी बना हुआ है कि अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने न आती, तो क्या यह मामला भी “आत्महत्या” बताकर बंद कर दिया जाता?
दो हॉस्टल, दो मौतें और एक जैसी लापरवाही
इन दोनों मामलों को जोड़कर देखा जाए तो एक खतरनाक पैटर्न सामने आता है—
- दोनों छात्राएँ पटना से बाहर की थीं
- दोनों NEET की तैयारी के लिए आई थीं
- दोनों निजी गर्ल्स हॉस्टलों में रह रही थीं
- दोनों मामलों में प्रशासन मौत के बाद हरकत में आया
घटना से पहले न कोई निगरानी, न कोई नियमित निरीक्षण और न कोई सुरक्षा ऑडिट।
किस कानून के भरोसे चल रहे हैं पटना के हॉस्टल?
पटना में सैकड़ों निजी गर्ल्स हॉस्टल और पीजी चल रहे हैं। लेकिन इनमें से कितने पंजीकृत हैं, कितनों का कभी प्रशासनिक निरीक्षण हुआ है—इसका कोई ठोस जवाब किसी के पास नहीं है। कई हॉस्टल “पीजी” का बोर्ड लगाकर नियमों से बच निकलते हैं। सीसीटीवी, महिला वार्डन, विजिटर रजिस्टर, रात की सुरक्षा—इनमें से कुछ भी कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है।
महिला सुरक्षा के दावे बनाम जमीनी हकीकत
सरकार महिला सुरक्षा को लेकर बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि पढ़ाई के लिए पटना आने वाली छात्राएँ एक ऐसे सिस्टम के भरोसे रह रही हैं, जहाँ उनकी सुरक्षा से ज्यादा हॉस्टल कारोबार की कमाई अहम हो गई है।
अब सवाल सिर्फ दो मौतों का नहीं
परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल और शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटनाएँ सिर्फ दो छात्राओं की मौत की खबर नहीं हैं। ये पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन अब भी सिर्फ जांच और SIT तक सीमित रहेगा या निजी हॉस्टलों के लिए सख्त कानून, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय की जाएगी? क्योंकि अगर सिस्टम अब भी नहीं जागा, तो पटना के इस कोचिंग हब से अगली खबर फिर किसी छात्रा की मौत की ही होगी।