Thursday, March 12, 2026

अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस समारोह में उपराष्ट्रपति ने बोली 22 भारतीय भाषाएं

-Advertise with US-

नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International mother language day) समारोह के अवसर पर मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन के महत्व को उजागर करते हुए उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (Vice president M. Venkaiah Naidu) ने आज 22 भाषाओं में बोल कर सभी को चकित कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों का आह्वाहन किया कि वे मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की शपथ लें और अन्य भाषाओं को भी सीखें।

उपराष्ट्रपति (Vice president of India) ने भारतीय भाषाओं (Indian languages) को प्रोत्साहित करने हेतु एक राष्ट्रीय आंदोलन चलाने का आह्वाहन करते हुए कहा कि जब हम मातृभाषा के संरक्षण की बात करते हैं तो हम वस्तुत: भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण और संवर्धन की भी बात करते हैं।

राजकीय पदों में भर्ती के लिए भारतीय भाषाओं का ज्ञान अनिवार्य होना चाहिए- उपराष्ट्रपति

भारतीय भाषाओं को रोज़गार से जोड़ते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक स्तर तक के राजकीय पदों में भर्ती के लिए भारतीय भाषाओं का ज्ञान अनिवार्य होना चाहिए। भाषा को समावेशी विकास के लिए आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन में स्थानीय भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हाई स्कूल तक शिक्षा का माध्यम अनिवार्यतः मातृभाषा होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने फैसलों की प्रति 6 भाषाओं में उपलब्ध कराए जाने की सराहना की और अपेक्षा की कि अधीनस्थ न्यायालय भी इस दिशा में कार्य करेंगे।

- Advertisement -

भारत की भाषाई विविधता के संरक्षण की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा का उत्सव कोई एक दिन का पर्व नहीं होना चाहिए बल्कि लोगों को अपनी मातृभाषा को अपनी रोज़ की जीवनचर्या का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

मातृभाषा के रूप में बोली जाती हैं19,500 भाषाएं या बोलियां

उन्होंने कहा कि भारत में 19,500 भाषाएं या बोलियां मातृभाषा के रूप में बोली जाती हैं। ये बोलियां हमारे सनातन संस्कारों, सदियों की सभ्यता में विकसित ज्ञान और अनुभव की साक्षी हैं।

- Advertisement -

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिक संरचना, उच्चारण, सरल लिपि और सहज व्याकरण भारतीय भाषाओं की पहचान रही हैं जिनमें प्राचीन, मध्य कालीन और आधुनिक काल में महान साहित्यिक कृतियों की रचना की गई।

भाषा मानव विकास के साथ विकसित होती है और प्रयोग के साथ ही जीवंतता पाती है

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाषा मानव विकास के साथ विकसित होती है और प्रयोग के साथ ही जीवंतता पाती है, अगर आप भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे, वो लुप्त हो जाएगी। एक भाषा के साथ एक ज्ञान परम्परा का भी लोप होता है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा 21 फरवरी को देश भर के एक लाख विद्यालयों में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मानने की पहल की सराहना की।

इससे पूर्व उपराष्ट्रपति जी के आगमन पर पारंपरिक भारतीय परिधानों में सज्जित विद्यार्थियों द्वारा 22 भारतीय भाषाओं में उनका स्वागत किया गया जो भारत की भाषाई विविधता को दर्शाता है। उन्होंने विभिन्न सरकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए पुस्तक स्टालों को भी देखा।

महात्मा गांधी को उद्दृत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपिता का मानना था कि मातृभाषा का तिरस्कार नहीं किया जाना चाहिए। महात्मा गांधी ने कहा था ” मैं नहीं चाहता कि मेरा घर चारों ओर से दीवारों से घिरा हो और उसकी खिड़कियां बंद हों। मैं चाहता हूं कि विश्व भर की संस्कृतियां मेरे घर में निर्बाध रूप से बसें लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं कि वे मेरे पैर उखाड़ दें।”

- Advertisement -
अभय पाण्डेय
अभय पाण्डेय
आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

Related Articles

-Advertise with US-

लेटेस्ट न्यूज़

Intagram

108 Followers
Follow