Health Stump: जैसे-जैसे ठंड का मौसम तेज़ हो रहा है, वैसे-वैसे पेशाब से जुड़ी समस्याओं के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार सर्दियों में पानी का सेवन कम हो जाना, ठंड के कारण ब्लैडर की संवेदनशीलता बढ़ना और संक्रमण की आशंका अधिक होना इसकी प्रमुख वजहें हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पेशाब से जुड़ी परेशानियों को हल्के में लेना शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
बुजुर्गों में दिख रही अधिक परेशानी- Dr. Gaurav Mishra
एक संक्षिप्त बातचीत में Patna URO Gynae & Stone Hospital के निदेशक और जाने-माने मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव मिश्रा कहते हैं—
ठंड के मौसम में पेशाब से जुड़ी समस्याएं खासकर बुजुर्गों में अधिक देखने को मिलती हैं। इस दौरान रात में बार-बार पेशाब लगना, जल्दी-जल्दी पेशाब आना और पेशाब पर नियंत्रण न रहना आम समस्या है। ये परेशानियां महिलाओं और पुरुषों—दोनों में हो सकती हैं।
ठंड के मौसम में पेशाब में खून आने के मामलों में भी इज़ाफा हुआ है, जो अक्सर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का संकेत होता है। ऐसे मामलों में यूरिन रूटीन और यूरिन कल्चर जांच कराना जरूरी है और रिपोर्ट के अनुसार दवा लेनी चाहिए, क्योंकि कई बार यह समस्या गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकती है। — डॉ. गौरव मिश्रा, वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट
किडनी से लेकर ब्लैडर तक पड़ता है सीधा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि पेशाब से जुड़ी समस्याओं का समय पर इलाज न होने पर इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। संक्रमण ऊपर की ओर बढ़कर किडनी तक पहुंच सकता है, जिससे किडनी में सूजन, पथरी और गंभीर मामलों में किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है।
मूत्राशय यानी ब्लैडर पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। बार-बार संक्रमण या पेशाब रोकने की आदत से ब्लैडर कमजोर हो सकता है, जिससे पेशाब पर नियंत्रण कम हो जाता है और जलन व दर्द की शिकायत बढ़ती है।
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पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने या उसमें सूजन आने पर मूत्र मार्ग संकरा हो जाता है। इसके कारण पेशाब की धार कमजोर पड़ जाती है, रुक-रुक कर पेशाब आता है और ब्लैडर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे समस्या और जटिल हो सकती है।
संक्रमण का असर मूत्र नली (यूरेथ्रा) पर भी पड़ता है, जिससे पेशाब करते समय जलन, दर्द और सूजन होती है। लंबे समय तक इलाज न मिलने पर मूत्र नली में संकुचन जैसी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
गंभीर मामलों में जान का भी खतरा
डॉक्टरों के अनुसार यदि संक्रमण बढ़ जाए तो बैक्टीरिया खून में फैल सकते हैं, जिससे बुखार, अत्यधिक कमजोरी और सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है। इसके अलावा किडनी के खराब होने से शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर बढ़ता है और इसका अप्रत्यक्ष असर हृदय पर भी पड़ता है।
ठंड में क्यों बढ़ जाती हैं ये समस्याएं
विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्दियों में पसीना कम आने के कारण प्यास कम लगती है और लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते। इससे पेशाब गाढ़ा हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ठंड में ब्लैडर अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे बार-बार पेशाब की इच्छा महसूस होती है।
डॉ. गौरव मिश्रा की सलाह, ये सावधानियां हैं जरूरी
- ठंड से बचाव बेहद जरूरी
- गर्म पानी का सेवन करें
- कान और पैरों को ढककर रखें
- रात में पानी कम पिएं, लेकिन दिन में ढाई से तीन लीटर पानी जरूर लें
- भोजन में फाइबर बढ़ाएं
- शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें
- प्रोस्टेट की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के बंद न करें
- समय पर डॉक्टर से संपर्क जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेशाब में जलन, खून आना, बार-बार पेशाब लगना या पेशाब रोकने में परेशानी जैसी शिकायत दो-तीन दिन से अधिक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।
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जाड़े में पेशाब से जुड़ी ये समस्याएं, सेहत के लिए चेतावनी
ठंड के मौसम में पेशाब से जुड़ी समस्याएं केवल असुविधा नहीं, बल्कि किडनी, ब्लैडर, प्रोस्टेट और पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए चेतावनी संकेत हैं। सही समय पर जांच, सावधानी और इलाज ही गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।