हारेंगे तो क्या VRS लेंगे नीतीश कुमार! कह दिया—मेरा अंतिम चुनाव

अजय वर्मा
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पटना: आखिरी चरण के चुनाव के पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने VRS लेने जैसा फैसला सुनाकर इमोशनल कार्ड खेला है जबकि तेजस्वी—चिराग को मसाला मिल गया और तंज कस रहे हैं। उन्होंने कहा कि आउट होने के बाद 15 साल का हिसाब किससे लेंगे। मालूम हो कि पूर्णिया के धमदाहा में आखिरी चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि ये मेरा आखिरी चुनाव है।

आखिरी चरण में ऐसा क्यों?

सवालयह है कि आखिरी चरण में ही ऐसा बयान क्यों दिया? क्या उन्हें हार का अंदाजा चल चुका है। क्या इसभावुक अपील से वोटर पसीज जायेंगे? सवाल का उत्तर खोजना आसान तो है तो रहस्यमय भी। खुलासा तो 10को ही मतगणना के साथहोगा। क्या पिछले दो चरणों में उन्हें जीत का भरोसा है।

क्या कहा नीतीश कुमार ने

नीतीश कुमार पूर्णिया जिले से धमदाहा सीट पर जदयू उम्मीदवार लेसी सिंह के लिए चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये चुनाव का आखिरी दिन है और मेरा ये अंतिम चुनाव है। कुमार ने कहा कि अंत भला तो सब भला। अब बताइए वोट दीजिएगा इनको। नीतीश कुमार के इस बात से साफ संदेश है कि उन्होंने सहानुभूति बटोरने की कोशिश की है।

फायदा या नुकसान

दरअसल, चुनावी रैलियों के दौरान नीतीश कुमार को कई जगहों पर विरोध का सामना करना पड़ा है। इस दौरान वह गुस्से में भी नजर आए हैं। चर्चा यह भी है कि पहले चरण की रिपोर्ट से भी वह संतुष्ट नहीं हैं। साथ ही दूसरे चरण से उम्मीद के मुताबिक भरपाई नहीं हो पा रही है।

सीमांचल में नहीं मिले सुर

पूरे चुनाव के दौरान एनडीए नेताओं के बयान में कहीं विरोधाभास नजर नहीं आए हैं। लेकिन नीतीश के संन्यास की घोषणा से एक दिन पहले यह भी हुआ है। सीमांचल इलाके में रैली के दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि देश से सभी घुसपैठियों को हम लोग बाहर भेजेंगे। जबकि नीतीश कुमार ने कहा था कि सब लोग यहीं रहेंगे, कोई बाहर नहीं जाएगा।

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समाचार संपादक
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