पटनाः बिहार विधानसभा में लोजपा संस्थापक स्वर्गीय रामविलास पासवान को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने इसे दलित-पिछड़ा समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह कड़ा विरोध दर्ज कराया। पूरे घटनाक्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक दल के नेता राजू तिवारी की भूमिका अग्रणी और निर्णायक रही।
सदन के भीतर ही किया था कड़ा विरोध
जानकारी के मुताबिक, जिस समय विधानसभा में रामविलास पासवान पर टिप्पणी की गई, उसी वक्त पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक दल के नेता राजू तिवारी ने तत्काल खड़े होकर उसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने इसे अमर्यादित बताते हुए उस पूरे वाक्य और बयान को सदन की कार्यवाही से बाहर रखने की मांग की।
राजू तिवारी ने कहा कि बिहार के गरीब, दलित और पिछड़ों की आवाज़ रहे पासवान को “बेचारा” कहना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन करोड़ों वंचित परिवारों का अपमान है, जिनके अधिकारों के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय को पासवान ने केवल नारा नहीं, बल्कि नीति और व्यवस्था बनाया था।
विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन
सदन के भीतर विरोध दर्ज कराने के बाद लोजपा (रा) के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। राजू तिवारी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इस टिप्पणी की निंदा की।
तिवारी ने कहा,“यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो दलित-पिछड़ों के मसीहा का अपमान करती है। सम्मान के साथ समझौता नहीं होगा और संघर्ष की विरासत को झुकने नहीं देंगे।”
रविवार को भी सड़क पर उतरी थी पार्टी
इससे पहले रविवार को भी लोजपा (रा) सांसद अरुण भारती के नैतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता पटना की सड़कों पर उतरे थे। शहर के प्रमुख स्थल कारगिल चौक पर कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव का पुतला दहन किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
स्पष्ट राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण में लोजपा (रा) ने दलित और पिछड़ा वर्ग के सम्मान के प्रश्न को केंद्र में रखकर स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। राजू तिवारी ने न केवल सदन के भीतर तीखी आपत्ति दर्ज कराई, बल्कि संगठन और कार्यकर्ताओं को भी एकजुट करते हुए यह संकेत दिया कि पार्टी अपने संस्थापक की विरासत और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।
फिलहाल, पासवान की विरासत को लेकर छिड़ी यह सियासी बहस बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और तीखी होने के संकेत दे रही है।
