Monday, February 23, 2026

राजू तिवारी पर साधु पासवान का हमला, लोजपा (रामविलास) ने दिया करारा जवाब

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पटनाः सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में राजद नेता साधु पासवान द्वारा “राजू तिवारी जी हैं कौन? ये वही राजू तिवारी हैं जो सामंतवादी, ब्राह्मणवादी, मनुवादी व्यवस्था के पोषक हैं” कहे जाने के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। बयान सीधे तौर पर LJP (Ramvilas) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता राजू तिवारी को लेकर था। पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

लोजपा (रामविलास) प्रवक्ता प्रो. विनीत सिंह ने कहा कि साधु पासवान का बयान निराधार है और इससे संगठन की एकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर विकास के मुद्दों पर काम कर रही है, जो विरोधियों को हजम नहीं हो रहा।

विनीत सिंह ने स्पष्ट किया-

“राजू तिवारी दलितों और हाशिये पर रहने वाले समाज की सेवा करने वाली पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता हैं, जो उनके समावेशी होने का प्रमाण है।”

साधु पर निशाना साधते हुए प्रो. विनीत ने कहा-

“जो लोग स्वर्गीय रामविलास पासवान जी के समय टिकट के लिए विवाद करते थे, उन्हें आज नैतिकता की बात नहीं करनी चाहिए।​”

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प्रो. सिंह ने कहा कि पार्टी के नेता चिराग पासवान “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के विजन के साथ आगे बढ़ रहे हैं और राजू तिवारी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक स्तर पर उस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तिवारी दलितों और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने हमेशा दलित समाज के गौरव और उनके प्रतीकों के लिए संघर्ष किया है।

विनीत सिंह ने अंत में कहा कि पार्टी अपने सिद्धांतों पर अडिग है और इस तरह की बयानबाजी से संगठन की एकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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संगठनात्मक भूमिका और पृष्ठभूमि

बताते चलें, राजू तिवारी वर्तमान में लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वे गोविंदगंज से पार्टी के विधायक हैं और विधानसभा में विधायक दल के नेता हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वे जिला और प्रखंड स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं और कार्यकर्ताओं से नियमित संवाद बनाए रखते हैं।

Read also: “रामविलास पासवान के सम्मान पर चोट बर्दाश्त नहीं”: सदन से सड़क तक LJP (R) का उग्र विरोध

2020 में राम विलास पासवान के निधन और उसके बाद पार्टी में आए विभाजन के दौर को संगठन के लिए चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है। उस समय कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के रुख बदलने की चर्चा रही। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि उस दौर में राजू तिवारी ने नेतृत्व के साथ बने रहने का फैसला किया और संगठनात्मक ढांचे को स्थिर रखने में भूमिका निभाई।

आरोप और राजनीतिक संदर्भ

हालांकि साधु पासवान के बयान को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह बयान राजनीतिक उद्देश्य से दिया गया है, जबकि आलोचक इसे वैचारिक बहस का हिस्सा मान रहे हैं।

पार्टी का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी से संगठन प्रभावित नहीं होगा। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे विवाद अक्सर पार्टी की आंतरिक शक्ति-संरचना और नेतृत्व की स्थिति पर भी रोशनी डालते हैं।

फिलहाल, लोजपा (रामविलास) की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि पार्टी अपने घोषित एजेंडे और संगठनात्मक ढांचे के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

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