Monday, February 16, 2026

New Trade Deal: 18% टैरिफ से किसान, ग्राहक या कारोबारी-किसे होगा फायदा?

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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए नए ट्रेड डील (New Trade Deal) में कई उत्पादों पर 18% टैरिफ तय किए जाने की चर्चा है। सरकार का दावा है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को नई दिशा देगा और भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच दिलाएगा। 18% टैरिफ जैसे स्पष्ट आंकड़े सामने आने से आम लोगों के बीच भी इस डील को लेकर जिज्ञासा और बहस बढ़ गई है।

हालांकि, इस समझौते को लेकर मतभेद भी साफ नजर आ रहे हैं। कोई इसे देश के लिए हितकर मान रहा है तो कोई अहितकर। ऐसे में इस रिपोर्ट के जरिए हम यह समझाने की कोशिश करेंगे कि असल में इस डील का देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है।

पहले क्या था, अब क्या होगा?

व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से पहले कई भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में औसतन 22% से 30% तक टैरिफ लगाया जाता था। इसी तरह भारत में भी कुछ अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर ऊंचा आयात शुल्क लागू था। अब नई व्यवस्था के तहत चयनित उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% किए जाने की बात कही जा रही है।

पुराने और नए टैरिफ का फर्क

🔹पहले: ज्यादा आयात शुल्क → सामान महंगा → व्यापार सीमित

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🔹अब: कम टैरिफ (18%) → प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी → आयात-निर्यात में तेजी की संभावना

हालांकि किन-किन उत्पादों पर यह दर लागू होगी, यह अंतिम सूची पर निर्भर करेगा।

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उद्योग और उपभोक्ता को संभावित लाभ

टैरिफ कम होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। भारत से टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक सामान या कृषि उत्पाद भारत में अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे आम उपभोक्ता को कुछ वस्तुओं में राहत मिल सकती है और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

18% टैरिफ से किसानों की चिंता बढ़ी

किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पाद 18% टैरिफ के साथ भारतीय बाजार में प्रवेश करते हैं, तो वे पहले की तुलना में सस्ते पड़ सकते हैं। अमेरिका में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी के कारण वहां का उत्पादन लागत कम होती है, जिससे भारतीय किसानों को मूल्य प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और सीमांत किसान इस प्रतिस्पर्धा से अधिक प्रभावित हो सकते हैं, खासकर डेयरी, दाल और अनाज क्षेत्र में।

New Trade Deal का छोटे उद्योगों पर असर

छोटे और मध्यम उद्योगों ने भी चिंता जताई है कि यदि अमेरिकी उत्पाद कम शुल्क के साथ आए, तो स्थानीय उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने के लिए सुरक्षात्मक प्रावधान किए जाएंगे।

नए ट्रेड डील से संतुलन की चुनौती

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, New Trade Deal अवसर और चुनौती-दोनों लेकर आई है। यदि निर्यात बढ़ता है और निवेश आता है तो रोजगार सृजन हो सकता है। वहीं, यदि आयात बढ़ता है और घरेलू उत्पादन प्रभावित होता है, तो किसानों और छोटे उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार इस समझौते को लागू करते समय घरेलू हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करती है।

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