पटनाः प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जनसुराज पार्टी को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पार्टी से जुड़े नेता प्रमोद कुमार राज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के फर्जी वीडियो व ऑडियो तैयार कर उन्हें अपने इंस्टाग्राम सोशल मीडिया अकाउंट के ज़रिये वायरल किया।
इस पूरे मामले की पुष्टि पुलिस और जांच एजेंसियों की ओर से की गई है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि वायरल किए गए वीडियो–ऑडियो डिजिटल रूप से एडिटेड थे और उनका मकसद भ्रम फैलाना और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करना बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया से सियासी साज़िश तक?
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय था और उसके अकाउंट से ऐसे कई कंटेंट पोस्ट किए गए, जिनमें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं की आवाज़ और वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। पुलिस का दावा है कि यह कृत्य आईटी एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
जनसुराज की छवि पर असर?
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में “नई राजनीति” और “नैतिक बदलाव” की बात कर रहे हैं। ऐसे में जनसुराज से जुड़े एक नेता पर लगे ये आरोप पार्टी की साख और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनसुराज की पूरी राजनीतिक रणनीति और सोशल मीडिया अभियान की भी जांच हो सकती है।”
फर्जी कंटेंट और लोकतंत्र पर खतरा
यह प्रकरण एक बार फिर उस गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है, जहां AI, एडिटिंग टूल्स और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनता की सोच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
अब निगाहें प्रशांत किशोर पर
फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशांत किशोर या जनसुराज पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सियासी गलियारों में यह सवाल तेज़ हो गया है कि—
क्या जनसुराज इस गिरफ्तारी से खुद को अलग बता पाएगी, या यह मामला पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बनेगा?